मानसून में माउंट आबू का सफर: पालनपुर पॉइंट ट्रेक पर मिलेगा अरावली का अद्भुत नज़ारा जीवनशैली एक घंटा पहले 3
राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में मानसून के समय 12 किलोमीटर लंबा पालनपुर पॉइंट ट्रेक पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मानसून में रोमांच का केंद्र

अगर आप इस मानसून के मौसम में राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पालनपुर पॉइंट की ट्रेकिंग को अपनी सूची में जरूर शामिल करें। यह 12 किलोमीटर लंबा ट्रेक वर्तमान में पर्यटकों और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों को काफी आकर्षित कर रहा है। यह पूरा रास्ता प्रकृति की गोद में बसा है और मानसून के दौरान इसकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

ट्रेक का रास्ता और प्राकृतिक खूबसूरती

पालनपुर पॉइंट तक जाने वाला यह रास्ता गौमुख मार्ग से प्रारंभ होता है। यह इलाका माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंतर्गत आता है, जिसकी वजह से यहां की जैव विविधता देखते ही बनती है। ट्रेकिंग के दौरान आप रास्ते में अपर कोदरा डैम के मनमोहक दृश्य देख सकते हैं। इसके साथ ही, मानसून की बारिश के कारण इस मार्ग पर कई छोटे और सुंदर झरने भी दिखाई देते हैं, जो इस पूरे सफर को यादगार बना देते हैं।

क्यों खास है पालनपुर पॉइंट

जब आप इस ट्रेक के अंतिम बिंदु यानी पालनपुर पॉइंट पर पहुंचते हैं, तो वहां से आपको अरावली पर्वतमाला का 360 डिग्री नजारा दिखाई देता है। इस जगह का नाम गुजरात के पालनपुर शहर के नाम पर रखा गया है क्योंकि साफ मौसम में यहां से गुजरात का यह शहर स्पष्ट नजर आता है। अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों का यह दृश्य पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।

सुरक्षा और सावधानी

चूंकि यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहां भालू और तेंदुए जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग ने कुछ विशेष निर्देश जारी किए हैं। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि:

  • ट्रेकिंग के लिए हमेशा वन विभाग द्वारा अधिकृत गाइड को साथ रखें।
  • जंगल के रास्तों पर सावधानी बरतें और निर्धारित मार्ग का ही पालन करें।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का सम्मान करें।
  • भीड़-भाड़ से बचने और दिन की रोशनी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए सुबह जल्दी निकलना बेहतर होता है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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