पत्नी और चार बच्चों का हक मारने वाले पति को टोंक कोर्ट का कड़ा सबक, सुनाई 660 दिन की जेल राजस्थान 2 महीने पहले 44
राजस्थान के टोंक में एक पारिवारिक अदालत ने अपने परिवार का गुजारा भत्ता न देने वाले पति को सख्त सजा सुनाई है। कोर्ट ने चार अलग-अलग मामलों में दोषी को कुल 660 दिनों के कारावास का आदेश दिया है।

टोंक फैमिली कोर्ट का कड़ा फैसला

राजस्थान के टोंक जिले में स्थित पारिवारिक न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने उस पति को 660 दिन की जेल की सजा सुनाई है, जिसने लंबे समय से अपनी पत्नी और चार बच्चों का भरण-पोषण करने के न्यायिक आदेशों की लगातार अनदेखी की थी। न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने इस मामले में कठोर फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया कि अदालत के निर्देशों का मजाक बनाने और परिवार की जिम्मेदारी से भागने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विवाद की शुरुआत और घरेलू प्रताड़ना

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2007 में हुई शादी में छिपी हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही पति और उसके ससुराल पक्ष के सदस्यों ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। महिला के अनुसार, उसे दहेज के लिए निरंतर परेशान किया जाता था और उसके साथ मारपीट की घटनाएं भी होती थीं। वर्षों तक इस जुल्म को सहने के बाद, अंततः वर्ष 2015 में आरोपी पति ने उसे और उनके चार मासूम बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद महिला और बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए थे।

कानूनी लड़ाई और अदालत का दखल

अपने और अपने बच्चों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए पीड़िता ने वर्ष 2017 में टोंक की फैमिली कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया शुरू की। अदालत में दायर परिवाद के बाद सुनवाई हुई और न्यायाधीश ने आरोपी पति को यह अनिवार्य निर्देश दिए कि वह नियमित रूप से अपने परिवार को गुजारा भत्ता प्रदान करे। हालांकि, पति ने अदालत के इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। उसने लंबे समय तक भरण-पोषण की राशि जमा कराने से किनारा कर लिया, जिससे महिला और उसके बच्चों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट पैदा हो गया।

660 दिन की सजा और संदेश

जब मामले की सुनवाई फिर से हुई, तो आरोपी को जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए टोंक फैमिली कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए भरण-पोषण से संबंधित चार अलग-अलग मामलों में उसे दोषी पाते हुए कुल 660 दिन की जेल की सजा भुगतने का आदेश सुनाया। कोर्ट का यह फैसला समाज के लिए एक नजीर बन गया है। अदालत ने अपने अवलोकन में यह साफ किया कि पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करना न केवल एक नैतिक कर्तव्य है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी बाध्यकारी है।

न्यायिक आदेश की अवहेलना पर नकेल

टोंक फैमिली कोर्ट का यह निर्णय उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अदालती आदेशों को मामूली समझते हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। न्यायाधीश ने अपने आदेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि यदि कोई व्यक्ति कानून की अवहेलना करता है, तो उसे उसके परिणाम भुगतने होंगे। यह फैसला महिलाओं और बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है। अब आरोपी को अपनी लापरवाही और अदालत के आदेशों की अनदेखी के चलते लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहना होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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