बरसात में गेहूं को घुन से बचाएं: साल भर अनाज सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके जीवनशैली एक घंटा पहले 5
मानसून के मौसम में नमी के कारण गेहूं में घुन और सुंडी लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिसे कुछ खास घरेलू उपायों और सही भंडारण तकनीकों से साल भर सुरक्षित रखा जा सकता है।

मानसून में नमी और अनाज की सुरक्षा

बरसात के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर हमारे अनाज को प्रभावित करता है। खासकर गेहूं में इस दौरान घुन और सुंडी लगने का खतरा कई गुना अधिक होता है। यदि समय रहते सही सावधानी न बरती जाए, तो पूरा का पूरा अनाज खराब हो सकता है और आपकी मेहनत बेकार जा सकती है। युवा प्रगतिशील किसान रनजोद सिंह का कहना है कि नमी अनाज की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब हवा की नमी अनाज के संपर्क में आती है, तो ये कीड़े पनपने लगते हैं और धीरे-धीरे अनाज को अंदर से खोखला कर देते हैं। इसलिए मानसून के आगमन से पहले ही सुरक्षात्मक कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

सही भंडारण का महत्व

गेहूं को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भंडारण का सही माध्यम चुनना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हमेशा सूखे और वायुरोधक ड्रम या कोठी का ही उपयोग करें। अनाज को भरने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका ड्रम पूरी तरह से साफ और सूखा हो। अगर ड्रम में थोड़ी भी नमी या हवा जाने की जगह होगी, तो कीड़े बहुत तेजी से फैलेंगे। इसके अलावा, ढक्कन को हमेशा मजबूती से बंद करके रखें ताकि बाहरी वातावरण की नमी अनाज तक न पहुँच सके।

नीम की पत्तियों का जादुई असर

प्राकृतिक रूप से कीड़ों को दूर भगाने के लिए नीम की सूखी पत्तियां एक रामबाण उपाय हैं। यह तरीका सालों से घरों में अपनाया जा रहा है। सबसे पहले नीम की ताजी पत्तियों को इकट्ठा करें और उन्हें तेज धूप में अच्छी तरह सुखा लें। जब पत्तियां पूरी तरह सूख जाएं, तो इन्हें पतले सूती कपड़े में बांधकर छोटी-छोटी पोटलियां बना लें। इन पोटलियों को गेहूं के ड्रम में अलग-अलग परतों के बीच में रख दें। नीम की तेज गंध के कारण घुन और सुंडी अनाज के आसपास भी नहीं फटकते हैं।

माचिस की तीलियों का कमाल

एक बेहद सस्ता और प्रभावी घरेलू नुस्खा माचिस की तीलियों का उपयोग है। माचिस के मसाले में फास्फोरस और सल्फर की मात्रा होती है, जिसकी गंध कीड़ों के लिए असहनीय होती है। आप कुछ माचिस की तीलियों को कपड़े में लपेटकर अनाज के ढेर में जगह-जगह दबा दें। यह तरीका अनाज को सुरक्षित रखने में काफी सहायक सिद्ध होता है और बिना किसी खर्च के कीड़ों को दूर रखता है।

भंडारण स्थान का चुनाव

अनाज का ड्रम रखने की जगह भी बहुत महत्वपूर्ण है। ड्रम को कभी भी सीधे जमीन या गीले फर्श के संपर्क में न रखें। जमीन की नमी धीरे-धीरे ड्रम के अंदर तक पहुंच सकती है, जिससे अनाज खराब हो जाता है। अपने भंडारण के बर्तनों को जमीन से थोड़ा ऊपर रखने के लिए ईंटों या लकड़ी के पट्टों का उपयोग करें। साथ ही, ड्रम को नमी वाली दीवार से हटाकर किसी हवादार स्थान पर रखें।

धूप में सुखाना है अनिवार्य

गेहूं को ड्रम में डालने से पहले उसे तेज धूप में सुखाना सबसे जरूरी चरण है। अनाज में थोड़ी सी भी नमी रहने पर घुन लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। कम से कम दो से तीन दिनों तक कड़क धूप में गेहूं को अच्छे से सुखाएं। इसके बाद अनाज को पूरी तरह ठंडा होने दें और फिर ड्रम में भरें। कभी भी गर्म या गुनगुना गेहूं ड्रम में न भरें, क्योंकि इससे भाप बनकर नमी पैदा हो सकती है।

नियमित निरीक्षण की आदत

अनाज को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर उसकी निगरानी करना बहुत जरूरी है। महीने में कम से कम एक या दो बार ड्रम को खोलकर जरूर देखें। अगर आप महीने के शुरुआती दिनों में ही कीड़ों के संक्रमण को पहचान लेते हैं, तो इसे संभालना आसान होता है। ऐसे में अनाज को निकालकर दोबारा धूप में फैला देने से कीड़े खत्म हो जाते हैं। थोड़ी सी सतर्कता और नियमित देखभाल से आप साल भर अपने अनाज की शुद्धता बनाए रख सकते हैं।

रासायनिक उपाय और सावधानी

यदि अनाज में कीड़ों का प्रकोप बहुत अधिक बढ़ गया है और घरेलू उपाय काम नहीं कर रहे, तो रासायनिक विधि का विकल्प बचता है। इसके लिए एल्युमीनियम फॉस्फाइड की गोलियों का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, यह बेहद जहरीली होती हैं, इसलिए इनका उपयोग केवल किसी कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। इन्हें इस्तेमाल करते समय सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि मानव स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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