क्या कुत्ता काटने से पहले लग सकता है रैबीज का टीका, एक्सपर्ट ने दी अहम जानकारी जीवनशैली 2 महीने पहले 76
रैबीज से बचाव के लिए लोग आमतौर पर कुत्ता काटने के बाद इंजेक्शन लगवाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्री-एक्सपोजर वैक्सीनेशन के जरिए इस जानलेवा बीमारी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

रैबीज से बचाव का एक सुरक्षित तरीका

आमतौर पर समाज में यह धारणा बनी हुई है कि रैबीज का इंजेक्शन केवल कुत्ता काटने या किसी जानवर के हमले के बाद ही लगवाया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि रैबीज के खिलाफ सुरक्षा के लिए पहले से ही तैयारी करना संभव और सुरक्षित है। इसे प्री-एक्सपोजर रैबीज वैक्सीनेशन के नाम से जाना जाता है। इस विषय पर बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर ज्ञान देव सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि रैबीज एक बेहद जानलेवा बीमारी है, इसलिए किसी घटना के इंतजार में रहने के बजाय पहले से ही टीकाकरण के प्रति जागरूक होना एक बुद्धिमानी भरा निर्णय है।

जागरूकता कार्यक्रम और वैक्सीन की सुरक्षा

सोमवार को विश्व जूनोसिस दिवस के मौके पर वन हेल्थ प्लेटफॉर्म के अंतर्गत बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम के दौरान वहां काम करने वाले डॉक्टरों, इंटर्न और अन्य कर्मचारियों ने खुद रैबीज का टीका लगवाकर समाज में एक मजबूत उदाहरण पेश किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि यह वैक्सीनेशन पूरी तरह से सुरक्षित है। कार्यक्रम के समन्वयक डॉक्टर कौशिक के अनुसार, जब स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग खुद टीका लगवाते हैं, तो इससे आम जनता का भरोसा बढ़ता है और लोग भी इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए आगे आते हैं।

कैसे काम करता है प्री-एक्सपोजर वैक्सीनेशन

डॉक्टर ज्ञान देव सिंह के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पहले से वैक्सीन लगवा लेता है, तो भविष्य में कुत्ता काटने की स्थिति में रैबीज होने का जोखिम न के बराबर रह जाता है। इस प्रक्रिया में तीन डोज लगाए जाते हैं। पहला डोज पहले दिन, दूसरा सातवें दिन और तीसरा डोज 21वें दिन दिया जाता है। इस शेड्यूल के पालन से शरीर में रैबीज वायरस के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाती है। विशेषज्ञ इसे एक आवश्यक निवेश मानते हैं क्योंकि रैबीज का इलाज न होने पर परिणाम घातक हो सकते हैं। यह वैक्सीन वही है जो आम तौर पर कुत्ता काटने के बाद दी जाती है, बस इसका समय और तरीका भिन्न है। इसे किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में लगवाया जा सकता है। यदि अस्पताल में सुविधा न हो, तो डॉक्टर की सलाह पर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी से इंजेक्शन लगवाया जा सकता है।

स्ट्रीट डॉग्स से खतरा और दस दिनों का नियम

आवारा या गली के कुत्तों के मामले में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक होती है। डॉक्टर सिंह बताते हैं कि किसी कुत्ते के रैबीज संक्रमित होने का पता लगाने का एक सामान्य मानक यह है कि यदि वह कुत्ता काटने के दस दिनों के भीतर मर जाता है, तो उसे संक्रमित माना जाता है। वहीं, अगर कुत्ता दस दिन बाद भी स्वस्थ है, तो संक्रमण की संभावना काफी कम होती है। समस्या तब पैदा होती है जब सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के बारे में यह ट्रैक करना असंभव हो जाता है कि वे जीवित हैं या नहीं। इसी अनिश्चितता के कारण प्री-एक्सपोजर वैक्सीनेशन को इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में व्यक्ति पहले से सुरक्षित रहे।

घाव का स्थान क्यों है इतना महत्वपूर्ण

रैबीज के इलाज में कुत्ता शरीर के किस हिस्से पर काटा है, इसका बहुत महत्व होता है। डॉक्टर ज्ञान देव सिंह ने विस्तार से समझाया कि वायरस कुत्ते की लार के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और नसों के सहारे धीरे-धीरे दिमाग की ओर बढ़ता है। एक बार वायरस दिमाग तक पहुंच जाए और लक्षण उभरने लगें, तो मरीज को बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही कारण है कि यदि काटा गया स्थान गर्दन, सिर, चेहरा या कंधे के करीब है, तो खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि वहां से वायरस का मस्तिष्क तक पहुंचना बहुत आसान और तेज होता है। ऐसी स्थितियों में केवल वैक्सीन पर्याप्त नहीं होती और अक्सर रैबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन जैसे उपचार की भी आवश्यकता पड़ती है। वहीं, यदि घाव पैर या शरीर के निचले हिस्सों में है, जो दिमाग से दूर हैं, तो वैक्सीन के जरिए रिकवरी की संभावनाएं बेहतर रहती हैं। संक्षेप में, स्थान जितना दिमाग के करीब होगा, समय का महत्व उतना ही बढ़ जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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