मानसून में इनडोर प्लांट्स को खराब होने से कैसे बचाएं? अपनाएं ये आसान टिप्स जीवनशैली 3 महीने पहले 121
बारिश और उमस भरे मौसम में इनडोर प्लांट्स की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ सामान्य गलतियों को सुधारना जरूरी है। भिवाड़ी के गार्डनिंग एक्सपर्ट अमित राणा ने पौधों को हरा-भरा रखने के लिए खास सुझाव दिए हैं।

बारिश में पौधों की देखभाल

मानसून के दौरान वातावरण में उमस बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर घर के अंदर रखे पौधों पर पड़ता है। अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि इस मौसम में पौधों की देखभाल कैसे करें, जिसकी वजह से वे सूखने या सड़ने लगते हैं। गार्डनिंग एक्सपर्ट अमित राणा ने बताया कि सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी से आप अपने पौधों को सालभर फ्रेश और चमकदार बनाए रख सकते हैं।

पानी देने में रखें सावधानी

बारिश के मौसम में पौधों की सबसे बड़ी दुश्मन नमी है। कई बार लोग नियम मानकर पौधों को रोज पानी देते हैं, लेकिन उमस के चलते मिट्टी जल्दी नहीं सूखती। अमित राणा के मुताबिक, गमले में जरूरत से ज्यादा पानी देने से पौधों की जड़ें गलने लगती हैं। इसलिए हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह को चेक करें और केवल जरूरत होने पर ही पानी डालें। मिट्टी में संतुलित नमी बनाए रखना पौधों को स्वस्थ रखने की पहली शर्त है।

मिट्टी का स्वास्थ्य और रखरखाव

पौधों की सेहत उनकी जड़ों की मजबूती पर निर्भर करती है। अगर गमले की ऊपरी मिट्टी पर हरी काई जम गई है, तो इसे तुरंत हटा दें। काई का जमना इस बात का संकेत है कि गमले में अतिरिक्त नमी है। इसके अलावा, सप्ताह में कम से कम एक बार मिट्टी की गुड़ाई जरूर करें। इससे मिट्टी में हवा का संचार बना रहता है और जड़ें सांस ले पाती हैं, जिससे पौधे की ग्रोथ बेहतर होती है।

खाद और पोषण का तरीका

पौधों को पोषण देने के लिए समय-समय पर सही खाद का चुनाव करना चाहिए। अमित राणा सुझाव देते हैं कि पौधों को वर्मी कम्पोस्ट दें और साथ में बहुत थोड़ी मात्रा में डीएपी का इस्तेमाल करें। यह पौधों को जरूरी ताकत देता है। इसके अलावा, केवल घर के अंदर रखने के बजाय पौधों को बीच-बीच में हल्की धूप और खुली हवा में भी रखना चाहिए, ताकि वे ताजी ऊर्जा पा सकें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से आपके इनडोर प्लांट्स हमेशा हरे-भरे बने रहेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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