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घर के बगीचे में ऐसे तैयार करें आकर्षक पौंड, खूबसूरती के साथ मिलेगी मच्छरों से मुक्ति
घर के छोटे से बगीचे में भी आप सुंदर पौंड बनाकर उसे एक नया लुक दे सकते हैं। इसमें पौधे और मछलियां पालने से न केवल आकर्षण बढ़ता है, बल्कि मच्छरों की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
गुड़हल में नहीं आ रहे फूल, नवरात्रि से पहले इन आसान टिप्स से आपका पौधा भी हो जाएगा फूलों से लबालब
नवरात्रि के दौरान गुड़हल के फूलों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन कई बार देखभाल में कमी के कारण पौधा हरा-भरा होने के बावजूद फूल नहीं दे पाता। पलामू के एक विशेषज्ञ किसान के बताए ये उपाय अपनाकर आप अपने पौधे पर ढेरों फूल पा सकते हैं।
घर में गार्डन बनाने का सपना होगा सच, इन पौधों के साथ छोटे फ्लैट को दें शानदार लुक
अगर आपके पास बागवानी के लिए अलग से जगह नहीं है, तो भी आप अपने घर के अंदर या बालकनी में खास पौधों को लगाकर हरियाली ला सकते हैं। यहाँ उन चुनिंदा पौधों की सूची दी गई है जो कम जगह में भी आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देंगे।
घर पर सीताफल उगाना है तो जान लें ये 5 जरूरी टिप्स, वरना नहीं मिलेंगे फल
सीताफल का पौधा घर या छत पर आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सही तरीके से देखभाल न करने पर पौधा केवल फूल देता है, फल नहीं।
छत पर उगाएं ताजी तुरई: अब बाजार से सब्जी खरीदने की नहीं पड़ेगी जरूरत
अगर आपके पास थोड़ी सी भी खाली जगह है, तो घर की छत या बालकनी में तुरई की बेल लगाकर आप ताजी और जैविक सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं। सही देखभाल और खाद के साथ कम मेहनत में आप घर पर ही खेती का आनंद ले सकते हैं।
6 साल से घर की छत पर फल-फूल रहा किचन गार्डन, सब्जियों के छिलके और चावल की भूसी से तैयार होती है जादुई खाद
मेदिनीनगर की अनु दुबे ने घर के किचन वेस्ट से खाद बनाने की एक अनोखी तकनीक विकसित की है। पिछले 6 वर्षों से वे अपनी छत पर ही इसी जैविक खाद के दम पर ताजी सब्जियां उगा रही हैं।
घर बैठे बनाएं अपना छोटा सा गार्डन, कटिंग से उगाएं ये 5 खास पौधे
नर्सरी से बार-बार पौधे या बीज खरीदने का खर्च बचाएं और घर पर ही कटिंग की मदद से अपने पसंदीदा पौधों को विकसित करें।
बरसात में घर पर उगाएं ताजी पालक और मेथी: गमले में छेद और 6 घंटे की धूप का रखें खास ख्याल
बरसात के मौसम में घर की बालकनी या छत पर पालक, मेथी और धनिया उगाना बेहद आसान है। बस सही मिट्टी, खाद और कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखकर आप ताजी सब्जियां घर पर ही प्राप्त कर सकते हैं।
घर में रखा है स्नेक प्लांट? इन आसान टिप्स से करें देखभाल और रखें इसे हमेशा हरा-भरा
स्नेक प्लांट को घर की शोभा बढ़ाने के लिए सबसे अच्छे इनडोर पौधों में गिना जाता है। अगर आप इसकी सही देखभाल के कुछ बुनियादी नियमों का पालन करें, तो यह पौधा बरसों तक स्वस्थ बना रहेगा।
बाजार से धनिया लाना भूल जाएंगे, सिर्फ डंठल का उपयोग कर घर पर उगाएं ताजी पत्तियां
रसोई में इस्तेमाल होने वाले हरे धनिये की डंठल को कचरे में फेंकने के बजाय आप घर पर ही नया पौधा तैयार कर सकते हैं। यह तरीका मिट्टी और पानी दोनों में बेहद आसानी से काम करता है और सालभर आपको ताजा धनिया मिल सकता है।
गार्डनिंग टिप्स: सब्जी के छिलकों को कचरा समझकर न फेंकें, घर पर मुफ्त में ऐसे बनाएं ऑर्गेनिक खाद, खिल उठेंगे आपके पौधे
घर की रसोई से निकलने वाले सब्जी और फलों के छिलकों को फेंकने के बजाय आप उनसे पौधों के लिए बेहद पौष्टिक जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। जानिए घर पर सॉलिड और लिक्विड कंपोस्ट बनाने का सबसे आसान तरीका।
एलोवेरा के पौधे की मानसून में ऐसे करें देखभाल, पत्तियों में भरेगा गाढ़ा जेल और तेजी से बढ़ेगा पौधा
बरसात के मौसम में एलोवेरा के पौधे को सड़ने और फंगस से बचाने के लिए खास देखभाल की जरूरत होती है। बागवानी विशेषज्ञ मो आलम से जानिए इस मौसम में पौधे की सुरक्षा और बेहतर विकास के जरूरी टिप्स।
छपरा के नरेंद्र सिंह ने अपनी छत को बनाया हरा-भरा बगीचा, उगाए हजारों औषधीय और फलदार पौधे
अगर आपके पास बागवानी के लिए जमीन की कमी है, तो छपरा के नरेंद्र सिंह का मॉडल आपके लिए एक बेहतरीन प्रेरणा है। उन्होंने अपनी छत को ही फलों, फूलों और औषधीय पौधों से लदा एक विशाल बगीचा बना दिया है।
बागवानी के टिप्स: नारियल के छिलकों और कवच को न समझें बेकार, घर पर बनाएं नेचुरल गमले और जैविक खाद
नारियल के छिलकों और कठोर कवच को कचरा मानकर फेंकने के बजाय आप इनका उपयोग गार्डनिंग में कर सकते हैं। इनसे न केवल सुंदर गमले तैयार होते हैं, बल्कि यह पौधों के लिए बेहतरीन जैविक खाद और कोकोपीट का भी काम करते हैं।
मात्र 100 रुपये के खर्च में घर पर उगाएं 25 किलो कोचई, जानें जैविक खेती का आसान तरीका
बस्तर की लोकप्रिय पारंपरिक सब्जी कोचई को अब आप अपने घर के गार्डन में आसानी से उगा सकते हैं। यह फसल तीन से चार महीने में तैयार हो जाती है और इसमें बीमारी का खतरा भी न के बराबर होता है।