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2 घंटे पहले
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गुलाब की बडिंग तकनीक से बदलें बगीचे का रंग
क्या आप अपने घर की बालकनी में लगे गुलाब के गमले को और अधिक आकर्षक बनाना चाहते हैं? अगर आप चाहते हैं कि एक ही पौधे पर आपको लाल और सफेद दोनों रंगों के गुलाब देखने को मिलें, तो यह कोई असंभव काम नहीं है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कृषि विशेषज्ञ राकेश राजवाड़े ने इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि बडिंग तकनीक का उपयोग करके कोई भी माली या शौकिया बागवान बड़ी आसानी से एक ही पौधे पर दो अलग-अलग रंगों के फूल उगा सकता है। इस प्रक्रिया को सही समय पर अंजाम दिया जाए, तो नवंबर के महीने तक पौधे में नई कलियां विकसित होने लगती हैं।
ग्राफ्टिंग और बडिंग का वैज्ञानिक तरीका
राकेश राजवाड़े के अनुसार, एक पौधे पर अलग-अलग रंग के गुलाब उगाने के लिए ग्राफ्टिंग या बडिंग सबसे कारगर तरीका है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले एक स्वस्थ रूट स्टॉक यानी ऐसे गुलाब के पौधे का चयन करना होगा जिसकी जड़ें पूरी तरह से विकसित और मजबूत हों। इसके बाद, आपको उन पौधों की तलाश करनी होगी जिनमें आप लाल और सफेद गुलाब के फूल चाहते हैं। उन पौधों से ऐसी कलियां चुनी जाती हैं जो पूरी तरह से विकसित हो चुकी हों, लेकिन जिनमें अभी फूल नहीं बना हो।
इन कलियों को एक साफ और धारदार चाकू की मदद से सावधानीपूर्वक निकालना होता है। इसके बाद, मुख्य पौधे यानी रूट स्टॉक की दो अलग-अलग शाखाओं पर छाल को T आकार में काट दिया जाता है। इस कटी हुई जगह के भीतर चुनी गई बड को बहुत सावधानी से फिट किया जाता है और फिर उसे ग्राफ्टिंग टेप की सहायता से मजबूती से बांध दिया जाता है ताकि वह अपनी जगह से न हिले।
बडिंग के बाद पौधों की देखभाल
बडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पौधे को खास देखभाल की जरूरत होती है। इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां तेज बारिश का सीधा पानी न पड़े और न ही बहुत अधिक नमी जमा हो। मिट्टी में हल्का गीलापन बना रहना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि पानी का जलभराव न हो, क्योंकि इससे पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं। इस तकनीक को अपनाने के बाद सामान्य परिस्थितियों में लगभग एक महीने के भीतर नई बड निकलना शुरू हो जाती है।
अक्टूबर और नवंबर का समय क्यों है खास?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गुलाब की बडिंग के लिए साल का अक्टूबर और नवंबर का समय सबसे बेहतर होता है। यदि किन्हीं कारणों से आप इस समय चूक जाते हैं, तो फरवरी और मार्च का महीना भी इसके लिए अनुकूल रहता है। यदि आप अक्टूबर में यह कार्य संपन्न करते हैं, तो नवंबर तक पौधे में नई कलियां आने लगती हैं और उसके बाद फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
खाद और मिट्टी का सही मिश्रण
पौधे की बेहतर ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए खाद का सही अनुपात और मिट्टी का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए आप निम्नलिखित मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं:
- 40% सामान्य मिट्टी
- 30% अच्छी तरह से सड़ी हुई जैविक कंपोस्ट
- 10% बालू या रेती (जो पानी की निकासी में मदद करती है)
- 15% कोकोपीट या चावल का हस्क (जो मिट्टी में नमी बनाए रखने का काम करता है)
- 5% नीमखली और बोनमील
खाद की मात्रा के मामले में सतर्क रहना जरूरी है। विशेषज्ञ NPK 19:19:19 को कम मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। जरूरत से ज्यादा खाद देने के बजाय पौधे की वास्तविक आवश्यकता को समझकर ही पोषण दें।
गमले का आकार और गुलाब की किस्में
गुलाब की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपने उसे किस तरह के गमले में लगाया है। इसके लिए 12 से 16 इंच या उससे बड़ा गमला सबसे उपयुक्त रहता है। यदि गमला छोटा होगा, तो जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी, जिससे पौधे की वृद्धि बाधित हो सकती है। गुलाब की प्रमुख किस्मों में मिनिएचर, टी हाइब्रिड और फ्लोरीबंडा शामिल हैं। मिनिएचर में छोटे फूल आते हैं, टी हाइब्रिड एक तने पर बड़ा फूल देने के लिए जानी जाती है, और फ्लोरीबंडा में फूलों के सुंदर गुच्छे दिखाई देते हैं। इन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी बालकनी को गुलाबों की महक और रंगों से भर सकते हैं।
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