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एक घंटा पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा फैसला
अमेरिका के फोर्ट हुड में 13 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले खूंखार हमलावर निदाल मलिक हसन की मौत की सजा को लेकर जारी सस्पेंस अब खत्म हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के जरिए घोषणा की है कि इस घटना को लाइव स्ट्रीम नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने अपने बयान में न केवल सजा की प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट की, बल्कि ओबामा प्रशासन के दौरान हुई खुफिया चूक पर भी कड़ा प्रहार किया है।
ओबामा प्रशासन की विफलता पर उठाए सवाल
ट्रंप ने अपने पोस्ट में इस बात को रेखांकित किया कि निदाल मलिक हसन, जो पहले अमेरिकी सेना में मेजर था, ने बाद में देश के साथ गद्दारी की। ट्रंप के मुताबिक, यह एक अत्यंत दुष्ट व्यक्ति है जिसने 13 लोगों की जान ली, जिनमें एक गर्भवती महिला सैनिक भी शामिल थी। इस हमले में उस महिला सैनिक और उसके अजन्मे बच्चे, दोनों की मौत हो गई थी। इसके अतिरिक्त, इस हमले में 32 अन्य बेगुनाह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ट्रंप ने दावा किया कि बराक हुसैन ओबामा के कार्यकाल के दौरान, FBI ने हसन और यमनी-अमेरिकी कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी के बीच हुई इलेक्ट्रॉनिक बातचीत को इंटरसेप्ट किया था। उन्होंने बताया कि FBI की आतंकवाद विरोधी टीम ने जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला था कि हसन के ईमेल से कोई खतरा नहीं है, जिसे बाद में खुफिया जगत की एक बड़ी और शर्मनाक नाकामी माना गया।
सजा के लाइव प्रसारण पर ट्रंप का स्पष्टीकरण
मौत की सजा के सीधे प्रसारण को लेकर ट्रंप ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हालांकि वे इस बात पर विचार कर रहे थे कि क्या इस सजा को दुनिया के सामने स्ट्रीम किया जाना चाहिए, ताकि आतंकवादियों को एक कड़ा संदेश दिया जा सके। ट्रंप का मानना है कि इससे यह पता चलता कि अमेरिका हसन जैसे घिनौने अपराधियों के साथ कैसे पेश आता है। उन्होंने आगे कहा कि कई लोगों की भावनाएं ऐसी हैं कि वे उसे मरते हुए नहीं देखना चाहेंगे, चाहे वह किसी भी माध्यम से हो। इसलिए, उसे निर्धारित समय पर फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का कोई लाइव प्रसारण नहीं होगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पीड़ितों के परिवारों के करीबी सदस्य अगर चाहें, तो वे वहां उपस्थित रहकर न्याय होते हुए अपनी आंखों से देख सकते हैं।
क्या था फोर्ट हुड हमला
निदाल मलिक हसन को आगामी 3 दिसंबर को मौत की सजा दी जानी है। साल 2009 में टेक्सास स्थित फोर्ट हुड मिलिट्री बेस पर हुई यह घटना अमेरिकी इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। निदाल तब फोर्ट हुड की एक मेडिकल बिल्डिंग में दाखिल हुआ था, जहां अमेरिकी सैनिक नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए आए थे। उस समय उसने 'अल्लाह हू अकबर' के नारे लगाते हुए लेजर साइट लगी हैंडगन से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस भीषण हमले में 13 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी और 30 से अधिक लोग जख्मी हुए थे।
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