गमले में पौधा लगाने का सही तरीका: विशेषज्ञ से जानें गार्डनिंग के खास नुस्खे जीवनशैली 2 महीने पहले 69
घर पर गमलों में पौधे लगाने के बाद उनके सूखने की समस्या आम है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सही तैयारी और मिट्टी के विशेष मिश्रण से आप पौधों को लंबे समय तक हरा-भरा रख सकते हैं।

गमले की तैयारी है सबसे जरूरी

आजकल अपने घरों में गमलों के जरिए सब्जियां, फूल और सजावटी पौधे उगाने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, कई लोग शिकायत करते हैं कि उनके पौधे लगाने के कुछ ही दिनों के भीतर सूखकर खराब होने लगते हैं। बागवानी विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि पौधों के मुरझाने का मुख्य कारण उन्हें लगाने के तरीके में खामी और देखभाल में बरती गई लापरवाही है। पौधा लगाने की शुरुआत करते समय सबसे पहले पुराने गमले को पूरी तरह से साफ करना बहुत आवश्यक है। यदि आप पहले से इस्तेमाल किए गए गमले का उपयोग कर रहे हैं, तो उसमें छिपे हुए कीड़े, फंगस या पुरानी मिट्टी नए पौधे के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

झारखंड का पारंपरिक तरीका और खाद का मिश्रण

झारखंड के बागवानी के जानकार पौधे लगाने की एक विशेष तकनीक अपनाते हैं। इस विधि में गमले के निचले हिस्से में सबसे पहले धान की भूसी की एक परत बिछाई जाती है। यह परत अतिरिक्त पानी को गमले से बाहर निकालने में मदद करती है, साथ ही मिट्टी में उचित नमी बनाए रखती है और पौधों की जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में हवा पहुंचना सुनिश्चित करती है। इसके बाद वर्मी कंपोस्ट, उपजाऊ मिट्टी और गोबर की खाद को आपस में मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें और इसे गमले में भरें।

पौधा लगाने की सही तकनीक

तैयार किए गए इस पोषणयुक्त मिश्रण में पौधे को बहुत सावधानी के साथ लगाएं ताकि उसकी नाजुक जड़ों को कोई चोट न पहुंचे। पौधे को लगाने के बाद ऊपर से मिट्टी और खाद की एक हल्की परत बिछा दें, जिससे उसे समय-समय पर जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि पौधों को पानी देते समय बहुत सतर्क रहना चाहिए। पौधों की जरूरत को समझे बिना बहुत ज्यादा पानी देना या फिर बहुत कम पानी देना दोनों ही स्थितियों में पौधा सूख सकता है। नियमित और सही मात्रा में पानी देना ही बागवानी की सफलता का असली मंत्र है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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