आम का नया बाग लगाने की है तैयारी? गड्ढा खोदने की यह वैज्ञानिक तकनीक बचाएगी आपका लाखों का नुकसान जीवनशैली एक महीने पहले 52
नया आम का बाग लगाते समय केवल पौधा रोप देना काफी नहीं है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, गड्ढे की खुदाई से लेकर मिट्टी के उपचार की एक विशेष प्रक्रिया को अपनाकर ही पौधों को सूखने से बचाया जा सकता है।

भारत में आम की बागवानी को बेहद मुनाफेदार माना जाता है, लेकिन अक्सर किसान शुरुआत में ही एक ऐसी गलती कर बैठते हैं जिससे उनकी पूरी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाते हैं। नया बाग लगाते समय अधिकांश लोग पौधों की रोपाई के लिए गड्ढे तैयार करने की सही तकनीक से अनजान होते हैं। इस लापरवाही के कारण नए पौधे कुछ ही समय में सूखने लगते हैं।

गड्ढे तैयार करने की सही वैज्ञानिक विधि

कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर की उद्यान वैज्ञानिक संचिता घोष के अनुसार, आम का नया बगीचा स्थापित करने के लिए गड्ढों की सही तैयारी करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। बाग लगाने के इच्छुक किसानों को सबसे पहले जमीन में 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे तैयार करने चाहिए। इन गड्ढों को खोदने के बाद तुरंत पौधा नहीं लगाना चाहिए, बल्कि इन्हें कम से कम 15 से 20 दिनों तक तेज धूप में खुला छोड़ देना बेहद जरूरी है।

सॉइल सोलराइजेशन: क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?

खोदे गए गड्ढों को तय समय के लिए खुली धूप में छोड़ने की इस वैज्ञानिक तकनीक को सॉइल सोलराइजेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने के कई बड़े फायदे हैं:

  • तेज धूप के प्रभाव से मिट्टी के भीतर मौजूद सभी हानिकारक कीट और दीमक नष्ट हो जाते हैं।
  • मिट्टी में छुपे हुए घातक फंगस और बीमारियां पैदा करने वाले बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाते हैं।
  • इस प्राकृतिक उपचार से रोपे गए नए पौधों के सूखने की आशंका बहुत कम हो जाती है।

गड्ढा भरने का सही तरीका और जरूरी सामग्री

उद्यान वैज्ञानिक के मुताबिक, धूप दिखाने की अवधि पूरी होने के बाद गड्ढों को वापस भरने के लिए भी वैज्ञानिक तरीका अपनाना चाहिए। इसके तहत सबसे पहले ऊपरी परत की उपजाऊ मिट्टी को अलग रख लेना चाहिए।

इसके बाद, इस उपजाऊ मिट्टी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद और कीड़ों से सुरक्षा के लिए थिमेट पाउडर का मिश्रण तैयार करना चाहिए। इस तैयार मिश्रण को गड्ढों में भरकर ही पौधों की रोपाई की जानी चाहिए।

सफल बागवानी के मूल मंत्र

विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से गड्ढे तैयार करने के साथ-साथ पौधों के बीच सही दूरी का ध्यान रखना भी जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया को अपनाकर लगाया गया आम का बाग पूरी तरह स्वस्थ रहता है और भविष्य में किसानों को अधिक उत्पादकता के साथ बंपर मुनाफा देता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप