मूंगफली की इन उन्नत किस्मों से किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा, एक्सपर्ट ने बताए बुवाई और खाद के खास नुस्खे मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 3
कृषि विभाग ने जिले की मिट्टी और जलवायु के अनुसार मूंगफली की कई रोग प्रतिरोधक और अधिक उपज देने वाली किस्मों की सिफारिश की है, साथ ही सही खाद और बीज उपचार को लेकर अहम सलाह भी दी है।

मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला खेती के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही यहां के किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। इस इलाके में खरीफ की सबसे प्रमुख फसल मूंगफली मानी जाती है। ऐसे में किसानों को भरपूर पैदावार मिल सके, इसके लिए कृषि विभाग के उप-संचालक पीएस करोरिया ने उपयोगी सुझाव दिए हैं। उन्होंने मूंगफली की चुनिंदा बेहतरीन किस्मों और खाद के सही मेल के बारे में जानकारी दी है, जिससे लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ सकता है।

शिवपुरी में मूंगफली है खरीफ की मुख्य फसल

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, शिवपुरी जिले में खरीफ के मौसम की सबसे अहम फसल मूंगफली ही है, जबकि इसके बाद किसान मक्का को तरजीह देते हैं। जिले के खनियाधाना, करेरा, पिछोर, पोहरी और नरवर बेल्ट में मूंगफली की बुवाई सबसे अधिक होती है। आमतौर पर 15 या 20 मई के बाद जैसे ही प्री-मानसून की पहली बारिश होती है, किसान खेतों की जुताई कर तेजी से बुवाई के काम में लग जाते हैं।

डीएपी नहीं, ‘सुपर’ है सबसे बेहतर विकल्प

खाद के सही उपयोग को लेकर उप-संचालक पीएस करोरिया ने एक जरूरी बात साझा की। उन्होंने बताया कि कोलारस और बदरवास क्षेत्र के किसान मक्का की खेती अधिक करते हैं, इसलिए वे फिलहाल उर्वरक का उठाव कर रहे हैं। इसके बाद पिछोर और खनियाधाना बेल्ट के मूंगफली किसानों की बारी आएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मूंगफली की फसल में किसान डीएपी का इस्तेमाल बेहद कम करते हैं। इसके बजाय सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। वहीं खड़ी फसल में टॉप ड्रेसिंग के दौरान यूरिया का उपयोग फसल के लिए फायदेमंद माना जाता है।

भरपूर पैदावार देने वाली मूंगफली की किस्में

अगर आप भी इस सीजन में मूंगफली से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो कृषि विभाग ने जिले की मिट्टी और जलवायु को ध्यान में रखते हुए कुछ शानदार किस्मों की सिफारिश की है। ये किस्में रोग प्रतिरोधक होने के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने के लिए भी पहचानी जाती हैं। अनुशंसित किस्में इस प्रकार हैं:

  • टीएजी-73 (TAG-73)
  • जीजी-40, जीजी-39, जीजी-37 और जीजी-23
  • नित्य हरिता वैरायटी (टीसीजीसी-1157)
  • कादरी लेपाक्षी (के-1812)

सही समय पर बुवाई और बीज उपचार जरूरी

कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि इन उन्नत किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाती हैं और इनके दानों में तेल की मात्रा भी अच्छी होती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे बीज हमेशा प्रमाणित केंद्रों से ही खरीदें और बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें। इससे फसल को शुरुआती रोगों और कीटों के प्रकोप से बचाने में मदद मिलती है और उत्पादन भी बेहतर होता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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