जम्मू-कश्मीर
एक घंटा पहले
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जम्मू-कश्मीर में खौफ फैलाने की नई साजिश
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए आतंकियों ने अपनी घिनौनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। इस बार आतंकियों के निशाने पर घाटी में काम करने वाले बाहरी राज्यों के मजदूर हैं। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी ULC नामक संगठन की ओर से एक धमकी भरा संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस संदेश में बाहरी मजदूरों को चेतावनी दी गई है कि वे जल्द से जल्द घाटी छोड़कर चले जाएं, अन्यथा उन्हें घातक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह संगठन पूरी तरह से प्रतिबंधित आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा का ही एक ऑनलाइन प्रॉक्सी फ्रंट है, जो सोशल मीडिया के जरिए आम नागरिकों के बीच डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
मजदूरों पर लगाया दिल्ली का मोहरा होने का आरोप
इस धमकी भरे पत्र में बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। आतंकियों ने दावा किया है कि ये बाहरी लोग शुरुआत में भिखारी बनकर इलाके में आए थे और अब प्रॉक्सी प्रशासन की मदद से यहां स्थाई रूप से बसने की साजिश रच रहे हैं। पत्र में आगे कहा गया है कि इन लोगों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन महज एक दिखावा है। आतंकियों ने खुलेआम धमकी दी है कि जो भी व्यक्ति दिल्ली के मोहरे के रूप में यहां काम करता रहेगा, वह हमारी गोलियों से बच नहीं पाएगा। संदेश में यह भी दावा किया गया है कि इन मजदूरों के शवों को उनके मूल स्थानों तक वापस भेज दिया जाएगा, जिससे साफ जाहिर है कि आतंकी हिंसा भड़काने की मंशा रखते हैं।
लगातार जारी है धमकियों का सिलसिला
यह पहला मौका नहीं है जब ULC ने इस तरह की घिनौनी हरकत की है। जुलाई और अगस्त 2026 से ही यह संगठन लगातार धमकियां दे रहा है। इससे पहले उनके निशाने पर कश्मीरी पंडित थे। उन धमकियों में तो बाकायदा कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम, उनके सटीक पते और उनके वाहनों के नंबर तक सार्वजनिक कर दिए गए थे, ताकि उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि यह एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक युद्ध है, जिसे आतंक फैलाने और सरकारी पुनर्वास कार्यक्रमों को विफल करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है।
मजदूरों के बीच बढ़ा दहशत का माहौल
जुलाई महीने में कुलगाम जिले में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो मजदूरों की टारगेटेड हत्या के बाद से ही घाटी में बाहरी कामगारों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल है। घाटी की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बाहरी मजदूरों पर टिका हुआ है। निर्माण कार्य, ईंट भट्ठे, बागवानी और अन्य कठिन शारीरिक श्रम के लिए बड़ी संख्या में लोग अन्य राज्यों से यहां आते हैं। हालांकि, इस तरह के हमलों और धमकियों ने न केवल उनकी आजीविका पर संकट पैदा कर दिया है, बल्कि उनके मन में अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी भारी चिंता पैदा कर दी है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई के निर्देश
इस पूरे घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के शीर्ष अधिकारियों और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ी नाराजगी जताई है। प्रशासन ने इन धमकी भरे पोस्टरों को अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इनके स्रोत का पता लगाने और दोषियों को पकड़ने के सख्त निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ, कश्मीरी पंडित समुदाय भी अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर निरंतर प्रदर्शन कर रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ने भी इन पत्रों की प्रामाणिकता और इनके पीछे छिपे असली चेहरों की गहराई से जांच करने की मांग की है। वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां इन डिजिटल संदेशों की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके और घाटी में शांति बनाए रखी जा सके। कुल मिलाकर, यह मामला लश्कर-ए-तैयबा के उस पैटर्न का हिस्सा है, जो सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और स्थानीय जनसांख्यिकीय ढांचे का लाभ उठाने के लिए आम लोगों को डरा-धमका रहा है।
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