एयरटेल की 'फास्ट लेन': नेट न्यूट्रलिटी पर फिर गरमाई बहस, महंगे प्लान वालों को मिलेगी सुपरफास्ट स्पीड तकनीक एक घंटा पहले 1
एयरटेल ने अपनी विवादित 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवा को अब 'फास्ट लेन' नाम दे दिया है, जिसके तहत महंगे प्लान वाले ग्राहकों को भीड़भाड़ में भी सुपरफास्ट 5G स्पीड का वादा किया गया है. इससे नेट न्यूट्रलिटी को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने अपनी चर्चित 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवा का नाम बदलकर अब 'फास्ट लेन' (Fast Lane) कर दिया है. सवाल यह है कि क्या आम और क्या खास, इंटरनेट तो सभी के लिए एक समान होना चाहिए, और इसी सिद्धांत को नेट न्यूट्रलिटी कहा जाता है. लेकिन एयरटेल के इस नए प्लान को देखकर लगता है कि कंपनी ने इस उसूल को किनारे रख दिया है.

सीधे शब्दों में कहें तो इस प्लान का मतलब इतना ही है कि आप जितनी ज्यादा जेब ढीली करेंगे और जितना महंगा प्लान लेंगे, भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी आपको उतना ही सुपरफास्ट इंटरनेट मिलेगा. यहां तक कि उन जगहों पर भी नेटवर्क चलता रहेगा, जहां आमतौर पर सिग्नल पकड़ना मुश्किल होता है.

नेट न्यूट्रलिटी पर छिड़ी बहस

गौरतलब है कि एयरटेल ने उसी पोस्टपेड प्लान का नाम बदला है, जिसने देश में नेट न्यूट्रलिटी को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया था. नेट न्यूट्रलिटी का अर्थ है कि सभी उपयोगकर्ताओं को बराबर इंटरनेट मिले. अब एयरटेल के कई पोस्टपेड ग्राहकों के मोबाइल स्क्रीन पर नेटवर्क सिग्नल के साथ साफ-साफ 'Fast Lane' लिखा दिखाई देने लगा है, और कंपनी ने यह बदलाव अपनी वेबसाइट पर भी कर दिया है.

जब इस पूरे मामले को लेकर एयरटेल के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या विवाद बढ़ता देख कंपनी ने इस वीआईपी प्लान को बंद कर दिया है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया. प्रवक्ता ने कहा कि प्लान को वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि उनका लॉन्च कैंपेन समाप्त हुआ है और अब इसे 'फास्ट लेन' नाम से पुकारा जा रहा है, जो उनकी सेवा को सटीक रूप से दर्शाता है.

कंपनी का दावा है कि इस प्लान को चुनने वाले और 5G फोन इस्तेमाल करने वाले पोस्टपेड ग्राहकों को हमेशा बेहतरीन स्पीड, अनलिमिटेड डेटा और उम्दा सेवा मिलती रहेगी.

नेटवर्क स्लाइसिंग में फंसा असली पेंच

असली मामला यहीं उलझता है. एयरटेल इसके लिए नेटवर्क स्लाइसिंग (Network Slicing) तकनीक का सहारा ले रही है. इसका मतलब यह है कि कंपनी अपने पूरे नेटवर्क का एक बड़ा और प्रीमियम हिस्सा सिर्फ महंगे पोस्टपेड ग्राहकों के लिए आरक्षित कर देगी. उदाहरण के तौर पर, अगर आप किसी भारी भीड़भाड़ वाले बाजार या स्टेडियम में हैं, जहां आमतौर पर इंटरनेट ठप हो जाता है, वहां भी 'फास्ट लेन' का इंटरनेट बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से चलता रहेगा.

एयरटेल का पक्ष

हालांकि एयरटेल का कहना है कि इस वीआईपी ट्रीटमेंट से आम प्रीपेड ग्राहकों के इंटरनेट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा, और कंपनी ने इससे जुड़ा पूरा डेटा नियामक संस्था ट्राई (TRAI) को भी सौंप दिया है. लेकिन सरकार और संसद की स्टैंडिंग कमेटी को यह तर्क रास नहीं आ रहा है.

सरकार और संसदीय समिति की चिंता

बीजेपी नेता निशिकांत दुबे की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने स्पष्ट रूप से चिंता जताई है कि कुछ कंपनियों के ऐसे प्रायोरिटी प्लान के कारण देश के करोड़ों गरीब और आम प्रीपेड मोबाइल उपयोगकर्ताओं के अधिकार छिन सकते हैं, जो नेट न्यूट्रलिटी के नियमों के खिलाफ है.

समिति ने दूरसंचार विभाग (DoT) और ट्राई से 25 दिनों के भीतर इस पर जवाब मांगा है कि क्या यह वास्तव में आम जनता के साथ भेदभाव है.

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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