महाराष्ट्र
एक घंटा पहले
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विचारों
दिल्ली से महाराष्ट्र तक बढ़ी सरगर्मियां
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के दोनों गुटों के एक साथ आने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राज्य से लेकर राजधानी दिल्ली तक नेताओं के बीच हो रही ताबड़तोड़ मुलाकातों ने इस कयासबाजी को और बल दिया है। हालांकि, पार्टी के मुखिया शरद पवार ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों गुटों के बीच किसी भी तरह के विलय की कोई बातचीत नहीं चल रही है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मुलाकातों का दौर
राजनीतिक गलियारों में हलचल की शुरुआत पिछले सप्ताह हुई, जब शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात की। इसके बाद दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें शरद पवार के साथ प्रफुल्ल पटेल, पार्थ पवार और सुनील तटकरे मौजूद थे। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए एनसीपी के अजित पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। तटकरे ने इस मुलाकात को मात्र एक शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई है।
मामला यहीं नहीं थमा, एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और सांसद बजरंग सोनवणे ने भी अमित शाह से मुलाकात की। अपनी सफाई में सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बैठक किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि एक पारिवारिक समारोह का निमंत्रण देने और अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को गृह मंत्री के समक्ष रखने के लिए आयोजित की गई थी।
शरद पवार और अजित पवार गुट का रुख
इन मुलाकातों के बाद जब मीडिया ने बारामती में शरद पवार से विलय के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हो रही है। दूसरी तरफ, अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता और मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने शरद पवार के कद का बखान करते हुए कहा कि वे देश के एक बड़े और अनुभवी नेता हैं, जिनसे सभी मिलते रहते हैं। भरणे ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर दोनों दलों के जो वरिष्ठ नेता फैसला लेंगे, पार्टी के सभी विधायक और मंत्री उस निर्णय के साथ खड़े रहेंगे।
बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी फिलहाल सावधानी बरत रही है। बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने केवल इतना कहा कि यदि शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के विजन के साथ मिलकर देश को आगे ले जाना चाहते हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने इस पूरे मामले से खुद को अलग रखते हुए कहा कि उन्हें विलय से ज्यादा जनता की समस्याओं, जैसे कि किसान, छात्र और युवाओं के भविष्य की चिंता है।
इसी बीच पुणे में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की सगाई का कार्यक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। माना जा रहा है कि इस पारिवारिक कार्यक्रम में पवार परिवार के सभी सदस्य एक साथ जुटेंगे, जिससे राजनीतिक कयासों का दौर और गहरा सकता है।
विलय की राह में सबसे बड़ी बाधा
राजनीतिक विश्लेषकों और सूत्रों का मानना है कि दोनों गुटों के बीच विलय न हो पाने के पीछे सबसे बड़ा कारण पार्टी नेतृत्व और संगठन पर कब्जे की खींचतान है। दोनों धड़े केंद्र और राज्य स्तर पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल विलय के बजाय एक मध्य मार्ग तलाशा जा रहा है, जिसमें शरद पवार की पार्टी मुद्दों के आधार पर एनडीए का समर्थन कर सकती है। चर्चा यह भी है कि संसद के आने वाले सत्र में यदि परिसीमन विधेयक पेश किया जाता है, तो शरद पवार गुट उसे अपना समर्थन दे सकता है।
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