बिहार
एक घंटा पहले
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सामने आई शर्मनाक घटना
बिहार के बेगूसराय जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक भरी पंचायत के बीच महिला के साथ न केवल तालिबानी सजा के नाम पर अमानवीय बर्ताव किया गया, बल्कि उसे सरेआम कान पकड़कर उठक-बैठक करने को मजबूर किया गया। हद तो तब हो गई जब पंचायत में जमीन पर थूक फेंककर महिला से उसे चटवाया गया। हालांकि यह पूरी घटना लगभग दो महीने पुरानी बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद हड़कंप मच गया है।
रेप पीड़िता को बनाया शिकार
वायरल वीडियो के संज्ञान में आने के बाद पीड़िता ने बलिया थाने में पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने उसे डरा-धमकाकर उसके घर में घुसकर जबरन बलात्कार किया था। घटना के अनुसार, 2 जून 2026 की सुबह जब आरोपी खिड़की के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तब ग्रामीणों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद मामले को सुलझाने के नाम पर पंचायत बैठी, जहां न्याय के बजाय पीड़िता के साथ ही अमानवीय व्यवहार किया गया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने जानकारी दी है कि बलिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। डीएसपी ने पुष्टि की कि यह घटना 2 जून 2026 की है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की तहकीकात कर रही है। हालांकि, महिला ने अपनी शिकायत में किसी भी व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं कराया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
यह घटना समाज के उस चेहरे को बेनकाब करती है जो आज भी कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस करता है। सवाल यह खड़ा होता है कि पंचायत के नाम पर लोगों को कानून से ऊपर होने का हक किसने दिया? साल 2026 में भी महिलाओं के साथ इस तरह का क्रूर और अपमानजनक बर्ताव सभ्य समाज पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को देखकर आक्रोशित हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। इससे पहले भी बिहार के वैशाली जिले से ऐसी ही तालिबानी सजा का मामला सामने आया था, जहां एक महिला को लाठी-डंडों और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया था। ऐसी घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि समाज के एक वर्ग में अभी भी संवेदनशीलता का कितना बड़ा अभाव है।
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