छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर से सटे गांवों में इन दिनों लगभग हर घर में आम के छिलके सुखाकर रखे जा रहे हैं। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तैयार किए जा रहे इन छिलकों से बनने वाला आमचूर बाजारों में 100 से 120 रुपये किलो तक बिकता है। यही वजह है कि ग्रामीण इसे सुखाकर बेच रहे हैं और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।
आमचूर बेचकर हो रही अतिरिक्त आमदनी
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा तैयार किया गया आमचूर स्थानीय बाजार में 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक आसानी से बिक जाता है। कई परिवार 5 से 10 किलो तक आमचूर बनाकर बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय मिलती है। जिन लोगों के पास नियमित रोजगार के अवसर नहीं हैं, उनके लिए यह बेहतर स्वरोजगार का जरिया साबित हो रहा है।
औषधीय गुणों से भरपूर है आमचूर
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार आमचूर में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसका उपयोग खासकर पाचन से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही यह कई तरह के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने में भी मददगार है।
सालभर किया जा सकता है इस्तेमाल
आमचूर को अच्छी तरह सुखाकर डिब्बों में सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए इसे ऑफ सीजन में भी आसानी से इस्तेमाल किया जाता है। भोजन में खट्टापन लाने के लिए इसका व्यापक रूप से उपयोग होता है।
शादी-विवाह और आयोजनों में बढ़ी मांग
आमचूर का इस्तेमाल शादी-विवाह, भोज और अन्य सामाजिक आयोजनों में बनने वाले अलग-अलग व्यंजनों में भी किया जाता है। हलवाई और रसोइए अपनी जरूरत और स्वाद के मुताबिक इसे विभिन्न व्यंजनों में शामिल करते हैं, जिससे भोजन का स्वाद और निखर जाता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा
जंगली आम से तैयार होने वाला आमचूर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहा है। कम लागत में बनने वाला यह उत्पाद न सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए उपयोगी है, बल्कि बाजार में इसकी बिक्री से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
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