सुप्रीम कोर्ट में एथेनॉल टेंडर विवाद: पेट्रोल में 20 फीसदी ब्लेंडिंग पर केंद्र सरकार का बड़ा रुख व्यापार एक महीने पहले 35
देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि 20 फीसदी ब्लेंडिंग का लक्ष्य यथावत है।

पेट्रोल में एथेनॉल का मुद्दा और सुप्रीम कोर्ट

भारत में पेट्रोल के साथ 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना को लेकर चल रही कानूनी खींचतान पर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मंगलवार को अदालत में एथेनॉल टेंडर से जुड़े विवाद पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग का निर्णय पूरी तरह से कायम है। इस मामले में एथेनॉल की आपूर्ति और आवंटन को लेकर जो विवाद पैदा हुआ है, उस पर कोर्ट में कार्यवाही जारी रहेगी। सरकार ने इसे एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयोग करार दिया है और कहा है कि इसके सटीक नतीजे अगले साल तक स्पष्ट हो पाएंगे।

विवाद की जड़ और कानूनी पेच

यह पूरा कानूनी मामला भारत पेट्रोलियम और केंद्र सरकार के बीच एथेनॉल टेंडर के आवंटन से संबंधित है। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया था। भारत पेट्रोलियम का पक्ष यह है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर चल रही 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग की योजना पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी वजह से यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है।

केंद्र सरकार का आधिकारिक पक्ष

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को जानकारी दी कि सरकार अपने लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस योजना के वास्तविक परिणाम अगले साल तक देखने को मिलेंगे। उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि देश के अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट में इस विषय से संबंधित कई याचिकाएं लंबित हैं। यदि विभिन्न न्यायालयों से परस्पर विरोधी आदेश आते हैं, तो इससे राष्ट्रीय नीति पर बुरा असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार सभी संबंधित मुकदमों को एक साथ सुनने के लिए ट्रांसफर याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

कोर्ट का रुख और अगली कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सभी दलीलें सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक यथास्थिति बरकरार रखी जाए। इसके साथ ही बेंच ने सवाल किया कि सरकार ने इस मामले को लेकर सीधे हाईकोर्ट की डिविजन बेंच का रुख क्यों नहीं किया। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के वकील सिद्धार्थ दवे ने केंद्र की ट्रांसफर याचिका पर आपत्ति जताते हुए इसे मामले को टालने और देरी करने की कोशिश बताया।

क्या पेट्रोल का फॉर्मूला बदलेगा

सुनवाई के उपरांत अटॉर्नी जनरल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयानों का संदर्भ केवल एथेनॉल की आपूर्ति और उसके आवंटन से जुड़ा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग की सरकारी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, तेल कंपनियों को कितनी मात्रा में एथेनॉल उपलब्ध कराया जाएगा, यह पूरी तरह से बाजार की मांग, उपलब्धता और अन्य मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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