सुल्तानपुर का 70 साल पुराना अनोखा शिवाला, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ संग पूरी होती हैं मनोकामनाएं उत्तर प्रदेश 18 घंटे पहले 6
सुल्तानपुर के लोहरा मऊ गांव में स्थित यह प्राचीन शिवाला पिछले 70 वर्षों से आस्था का केंद्र है, जिसे स्थानीय व्यापारी तुलसी राम गुप्ता ने बनवाया था। शिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्था और मान्यताओं की भूमि रहा है। देश के कोने-कोने में ऐसे अनेक धार्मिक स्थल मौजूद हैं जिन पर लोगों की गहरी श्रद्धा टिकी हुई है। ऐसा ही एक भगवान शंकर का शिवाला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित है, जो आज स्थानीय लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

इस शिवाला को स्थानीय व्यापारी तुलसी राम गुप्ता ने बनवाया था, लेकिन संयोग कुछ ऐसा रहा कि इसे बनवाने वाले और उनके परिवार के लोग अब न तो इस शिवाला के आसपास हैं और न ही गांव में। वे कहां चले गए, इसकी कोई जानकारी आज तक किसी को नहीं है। इसके बावजूद यह शिवाला सुल्तानपुर के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रहती है।

मुख्यालय से कितनी दूर है यह शिवाला

लोहरा मऊ का यह शिवाला सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 4 किलोमीटर और पयागीपुर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि 70 वर्ष पुरानी यह इमारत प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से बनवाई गई थी। इसी कारण इससे जुड़ी कहानी और इतिहास को लेकर लोगों में खासी जिज्ञासा बनी रहती है।

रहस्य बनकर रह गया इतिहास

इस शिवाला की सबसे खास बात यह है कि यहां कोई पुजारी नहीं है, बल्कि इसके संरक्षक हैं। मंदिर की देखरेख कर रहे अनंत नारायण मिश्र ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह मंदिर 70 सालों से भी अधिक पुराना है, जिसे स्थानीय व्यापारी तुलसी राम गुप्ता ने बनवाया था। हालांकि उनके परिवार के लोग अब इस गांव में नहीं रहते और वे कहां चले गए, यह आज तक एक राज ही बना हुआ है।

स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र

सुल्तानपुर जिले के लोहरा मऊ गांव में स्थित यह प्राचीन शिवाला स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां सुल्तानपुर समेत आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस शिवाला की खास बात यह है कि यहां केवल भगवान शंकर का शिवलिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्राचीन प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।

इनमें भगवान गणेश की प्रतिमा, नंदी की प्रतिमा, मां दुर्गा की प्रतिमा और अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां शामिल हैं, जिनकी श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।

कभी था सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र

लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित यह मंदिर भले ही अब अपनी पहचान खोता जा रहा हो, लेकिन कभी यह सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। अनंत नारायण मिश्र के संरक्षण में यह मंदिर एक बार फिर लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनता जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि मंदिर की देखरेख और मरम्मत समय-समय पर उनके द्वारा कराई जाती रहती है।

शिवरात्रि पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का हुजूम

आज भी शिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, यही वजह है कि लोगों की इस शिवाला के प्रति आस्था लगातार गहरी होती जा रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!