जब अंग्रेजों ने तोप से उड़ाया था पूरा सुल्तानपुर, लंदन की संसद तक पहुंची थी यहां के वीरों की दहाड़ उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 48
1857 की क्रांति में सुल्तानपुर के रणबांकुरों ने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। बौखलाए अंग्रेजों ने पूरे पुराने शहर को तोप से उड़ा दिया, और यहां की बगावत की गूंज सात समंदर पार ब्रिटिश संसद तक पहुंची।

उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला आजादी की पहली लड़ाई का एक ऐसा अध्याय अपने सीने में समेटे हुए है, जिसे जानकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। 1857 की क्रांति के दौरान यहां के वीरों ने अंग्रेजी सत्ता की नींव तक हिला दी थी।

बगावत की आग और अंग्रेजों का खौफ

1857 की पहली क्रांति में सुल्तानपुर के रणबांकुरों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला कि अंग्रेज दहशत में आ गए। इस बगावत ने उन्हें इतना भयभीत कर दिया कि उन्होंने अपनी ताकत का सबसे क्रूर रूप दिखाने का फैसला किया।

तोप से उड़ा दिया गया पूरा शहर

अपने डर और गुस्से के चलते अंग्रेजों ने तोपें चलाकर पूरे पुराने सुल्तानपुर शहर को ही तबाह कर दिया। पुराने नगर को मटियामेट करने के बाद उन्होंने गोमती नदी के किनारे एक नया शहर बसाया, जो आज के सुल्तानपुर की बुनियाद बना।

ब्रिटिश संसद तक पहुंची गूंज

सुल्तानपुर के वीरों का यह अदम्य साहस सिर्फ अपने इलाके तक सीमित नहीं रहा। उनके हैरान कर देने वाले हौसले का असर इतना गहरा था कि इसकी गूंज सात समंदर पार लंदन में बैठी ब्रिटिश संसद तक जा पहुंची।

गौरवशाली विरासत

यह कहानी सुल्तानपुर के उस रोंगटे खड़े कर देने वाले इतिहास की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शौर्य और बलिदान की मिसाल है। यहां के रणबांकुरों ने जो जज्बा दिखाया, वह आज भी इस धरती की पहचान बना हुआ है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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