उपनाम: 1857 की क्रांति
1857 की क्रांति के महानायक सार्दुलसिंह देवड़ा, जिन्हें आज लोकदेवता के रूप में पूजते हैं लोग
सिरोही जिले के रोवाड़ा गांव के रहने वाले सार्दुलसिंह देवड़ा ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। आज उन्हें जुजार बावसी के रूप में सिरोही, जालोर और पाली के इलाकों में श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।
झांसी के किले में स्थित ऐतिहासिक पंचमहल: बुंदेलखंड के गौरव और रानी लक्ष्मीबाई की वीर गाथा का साक्षी
झांसी के किले के भीतर बना पंचमहल न केवल बुंदेलखंड की भव्य वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि यह 1857 की क्रांति और रानी लक्ष्मीबाई के संघर्षपूर्ण जीवन का मूक गवाह भी रहा है।
कोहरा रियासत: 1857 की क्रांति का वो अजेय गढ़, जहाँ से लिखी गई वीरता की अमर गाथा
अमेठी की ऐतिहासिक कोहरा रियासत का इतिहास शौर्य और त्याग का जीवंत उदाहरण है, जिसकी स्थापना सन 1636 में हुई थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यहाँ के शासक बाबू भूप सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय दिया था।
जब अंग्रेजों ने तोप से उड़ाया था पूरा सुल्तानपुर, लंदन की संसद तक पहुंची थी यहां के वीरों की दहाड़
1857 की क्रांति में सुल्तानपुर के रणबांकुरों ने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। बौखलाए अंग्रेजों ने पूरे पुराने शहर को तोप से उड़ा दिया, और यहां की बगावत की गूंज सात समंदर पार ब्रिटिश संसद तक पहुंची।