मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान से 2000 करोड़ के साम्राज्य तक: अखंड स्वरूप पंडित की प्रेरणादायक कहानी व्यापार एक घंटा पहले 5
राजस्थान के एक सामान्य परिवार से आने वाले अखंड स्वरूप पंडित ने कड़ी मेहनत के दम पर शून्य से शुरुआत की और आज वे 2000 करोड़ के 'द कैटलिस्ट ग्रुप' के संस्थापक हैं।

संघर्ष से सफलता की राह

सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके लिए वर्षों का धैर्य और अथक परिश्रम आवश्यक होता है। राजस्थान के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अखंड स्वरूप पंडित की कहानी इस बात का जीता-जागता प्रमाण है। एक समय ऐसा भी था जब वे अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए मोबाइल की दुकानों पर काम करते थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह युवा, जो दूसरों के फोन ठीक करने में अपना समय बिताता था, एक दिन 2000 करोड़ रुपये के विशाल बिजनेस साम्राज्य का मालिक बनेगा।

आईईएस अधिकारी से उद्यमी तक का सफर

अखंड स्वरूप पंडित ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपनी मेहनत के बल पर इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास की। एक सरकारी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उन्हें जीवन की सुख-सुविधाएं मिल रही थीं, लेकिन उनके भीतर छिपा उद्यमी अभी भी जागृत था। वे हमेशा से ही व्यापार की दुनिया में कुछ बड़ा करना चाहते थे। अंततः, उन्होंने अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी को अलविदा कहने और अपने सपनों को पूरा करने का साहस दिखाया।

द कैटलिस्ट ग्रुप की नींव

अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने द कैटलिस्ट ग्रुप की स्थापना की। शुरुआत में यह समूह मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। राजस्थान से शुरू हुई यह छोटी सी पहल देखते ही देखते एक बड़े एंटरप्राइज में तब्दील हो गई। आज यह ग्रुप न केवल शिक्षा, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी धाक जमा चुका है। कंपनी का बाजार मूल्य 2000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जो अखंड स्वरूप पंडित के दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी

इस ग्रुप की सफलता का मूल आधार शिक्षा ही रहा है। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने इस ग्रुप की सेवाओं का लाभ उठाया है। इतना ही नहीं, इस संस्थान से पढ़कर 20 हजार से अधिक टॉप रैंकर्स निकले हैं, जिन्होंने देश भर में अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। शिक्षा के क्षेत्र में मिली इसी अपार सफलता ने ग्रुप को अन्य क्षेत्रों में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया।

विविध क्षेत्रों में विस्तार की रणनीति

आज द कैटलिस्ट ग्रुप केवल कोचिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी ने अपनी विस्तार रणनीति के तहत रियल एस्टेट, FMCG और इंटरनेशनल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में भी भारी निवेश किया है। इस बहुआयामी विस्तार का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत बिजनेस इकोसिस्टम का निर्माण करना है। ग्रुप के अनुसार, आज वे जिन भी सेक्टर्स में काम कर रहे हैं, उन सभी में तेजी से ग्रोथ देखी जा रही है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कंपनी ने शिक्षा के साथ-साथ इन नए कार्यक्षेत्रों में भी खुद को सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य

अखंड स्वरूप पंडित का मानना है कि व्यापार में निरंतरता और नए अवसरों की तलाश बहुत जरूरी है। हालांकि शिक्षा अभी भी उनके बिजनेस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कंपनी का ध्यान अब पूरी तरह से अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने पर है। भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए उन्होंने संकेत दिया कि राजस्थान के अलावा उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी अपनी पहुंच को और अधिक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है। वे खुद को केवल एक उद्यमी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे इकोसिस्टम के जनक के रूप में देख रहे हैं जो युवाओं को रोजगार के अवसर देने के साथ-साथ समाज में बदलाव भी ला सके। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि यदि इरादे पक्के हों, तो मोबाइल की दुकान पर काम करने वाला व्यक्ति भी राष्ट्र के बड़े कारोबारियों की सूची में अपना नाम शामिल करवा सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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