दिल्ली और हरियाणा सहित 6 राज्यों में मतदाता सूची संशोधन की डेडलाइन बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद भारतीय चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत 6 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समयसीमा में विस्तार किया है।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर अपनाई गई सख्ती के मद्देनजर चुनाव आयोग ने दिल्ली सहित कुल 6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध पर आयोग ने पूरे कार्यक्रम में फेरबदल करते हुए नई तारीखें जारी की हैं।

दावे और आपत्तियों की नई समयसीमा

चुनाव आयोग की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने या उसमें सुधार करने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख में बदलाव किया गया है। अब दिल्ली के नागरिक मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी तरह की त्रुटि सुधारने या नए नाम जोड़ने के लिए अपने दावे और आपत्तियां 25 नवंबर तक दर्ज करवा सकेंगे। पहले यह समयसीमा 30 अक्टूबर तक ही निर्धारित थी।

अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

प्रक्रिया के अगले चरणों में भी बदलाव किया गया है। आयोग के अनुसार, नागरिकों द्वारा दाखिल किए गए दावों और आपत्तियों के निस्तारण और उन पर नोटिस जारी करने का कार्य अब 15 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इन तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, दिल्ली की संशोधित अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 22 दिसंबर को किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का प्रभाव

चुनाव आयोग का यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने और संशोधन प्रक्रिया से जुड़ी समय-सीमाओं को लेकर काफी कड़ा रुख अपनाया था। न्यायालय की इस स्पष्ट नाराजगी और सख्ती के बाद ही चुनाव आयोग ने इन राज्यों के लिए संशोधित कार्यक्रम जारी किया है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम जनता की भागीदारी को और अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जा सके। सीईओं के अनुरोध पर लिया गया यह कदम मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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