सिलाई मशीन बनी किस्मत की चाबी: जमुई की सोनी देवी ने घूंघट की बंदिशें तोड़कर ऐसे हासिल की बड़ी कामयाबी व्यापार एक महीने पहले 73
जमुई की रहने वाली सोनी देवी ने घर की आर्थिक तंगी से लड़ते हुए अपनी सिलाई कला को व्यवसाय का रूप दिया और आज एक आत्मनिर्भर उद्यमी बन चुकी हैं। उन्होंने न केवल अपने दम पर कर्ज चुकाया, बल्कि लोन लेकर ननद की शादी भी धूमधाम से संपन्न कराई।

घूंघट की बेड़ियां तोड़कर बनीं मिसाल

बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो समाज की पुरानी सोच को चुनौती देती है। जमुई के खैरा प्रखंड की रहने वाली सोनी देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो घर की चारदीवारी और परंपराओं की बंदिशें सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। सोनी देवी ने शादी के बाद घूंघट प्रथा और सामाजिक दबावों को दरकिनार कर अपनी मेहनत और लगन से उद्यमिता की एक नई मिसाल कायम की है। आज वह न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने आसपास की अनेक लड़कियों को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।

मायके की सिलाई मशीन से शुरू हुआ सफर

सोनी देवी का वैवाहिक जीवन वर्ष 2011 में शुरू हुआ, जब उनका विवाह राजू कुमार के साथ हुआ। ससुराल आने के बाद आर्थिक चुनौतियां उनके सामने मुंह बाए खड़ी थीं। परिवार की जरूरतों को पूरा करना एक संघर्ष बन गया था, लेकिन सोनी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने मायके से दहेज में मिली सिलाई मशीन को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। वर्ष 2016 में वह जीविका के 'बमबम जीविका स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं, जिसने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। यहीं से उन्होंने अपने भीतर छिपे हुनर को पहचाना और सिलाई को एक व्यवसाय के रूप में विकसित करना शुरू किया।

हुनर को बनाया कमाई का जरिया

सोनी देवी बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें सिलाई और कढ़ाई का गहरा शौक था। उन्होंने इसी शौक को अपना व्यवसाय बनाकर उसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया। शुरुआती दिनों में केवल एक सिलाई मशीन से काम शुरू करने वाली सोनी ने मेहनत के दम पर आज अपने पास 4 से अधिक सिलाई मशीनें जोड़ ली हैं। उनके केंद्र पर गांव की दो दर्जन से अधिक लड़कियां सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं। सोनी ने न केवल खुद को एक कुशल उद्यमी के रूप में स्थापित किया है, बल्कि वह गांव की अन्य युवतियों को भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कर्ज से मुक्ति और परिवार का सहारा

सोनी देवी की सफलता केवल उनके केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक नींव को भी मजबूत किया है। वर्ष 2018 में प्रशिक्षण का कार्य शुरू करने के बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने जीविका के माध्यम से लगभग ₹150000 का लोन लिया था। इस धनराशि का उपयोग उन्होंने अपनी ननद की शादी धूमधाम से संपन्न कराने में किया। सोनी बताती हैं कि समय-समय पर व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने कई अन्य लोन भी लिए, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और सिलाई से होने वाली कमाई के जरिए उन्होंने सभी कर्ज पूरी तरह से चुका दिए हैं।

सफलता का विस्तार और भविष्य की राह

आज सोनी देवी का काम केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है। शादी-विवाह के सीजन में वह बड़े ऑर्डर्स भी लेती हैं, जिससे उन्हें अच्छी अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। इस कमाई का उपयोग वह अपने परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने में कर रही हैं। इतना ही नहीं, वह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बचत भी कर रही हैं। सोनी का कहना है कि उन्होंने अब तक का सफर बहुत संघर्ष के साथ तय किया है, लेकिन आने वाले दिनों में वह अपने कारोबार को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने का इरादा रखती हैं ताकि वह समाज की और भी जरूरतमंद महिलाओं की मदद कर सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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