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एक दिन पहले
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सीतामढ़ी जिले के एक प्रतिभाशाली युवक ने देश की सुरक्षा से जुड़े सबसे सम्मानित मंच पर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। डुमरा कोर्ट में एडवोकेट के रूप में कार्यरत श्याम कुमार और गृहणी सुनीता देवी के मेधावी पुत्र शशिरंजन सुमन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ जिले के वकीलों, प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों में खुशी और गर्व का माहौल है।
देहरादून में हुई भव्य पासिंग आउट परेड
शशिरंजन सुमन ने 13 जून 2026 को उत्तराखंड के देहरादून में स्थित प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) से अपना कठिन प्रशिक्षण पूरा किया। इस गौरवशाली पासिंग आउट परेड के बाद वे आधिकारिक रूप से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त कर अधिकारी बन गए। इस भव्य और ऐतिहासिक समारोह की मुख्य अतिथि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रहीं, जिनकी मौजूदगी ने यह पल शशिरंजन और उनके परिवार के लिए और भी यादगार बना दिया।
सैनिक स्कूल में पड़ी अनुशासित जीवन की नींव
संयुक्त परिवार में पले-बढ़े लेफ्टिनेंट शशिरंजन सुमन बचपन से ही बेहद अनुशासित, गंभीर और तेज बुद्धि के रहे हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई सीतामढ़ी के ही श्रीरामकृष्ण पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने देश के बेहद प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल कझकूटम (केरल) की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक की शिक्षा उन्होंने केरल के इसी सैनिक स्कूल से पूरी की, जिसने उनके भीतर देश सेवा का जज्बा और सैन्य अनुशासन की मजबूत बुनियाद तैयार की।
शशिरंजन बताते हैं कि सैनिक स्कूल के माहौल ने ही भारतीय सेना के प्रति उनके झुकाव को और मजबूत किया। वे छुट्टियों में भी पढ़ाई से दूर नहीं रहते थे और अपने बड़े भाई तथा सोनू सर जैसे स्थानीय शिक्षकों से लगातार मार्गदर्शन लेते रहते थे।
जेईई मेन्स में हासिल की ऑल इंडिया 12वीं रैंक
शशिरंजन की प्रतिभा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक जेईई मेन्स (JEE Mains) के माध्यम से भारतीय सेना की टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) में पूरे भारत में 12वीं रैंक (AIR 12) हासिल की। इस शानदार सफलता के बाद उन्हें सेना के तकनीकी और सामरिक विंग के लिए चुना गया। इसके बाद उन्होंने चार वर्षों तक बेहद कठिन तकनीकी और सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया और आज इस मुकाम तक पहुंचे।
सफलता का श्रेय माता-पिता और पूरे परिवार को
अपनी इस उपलब्धि पर बात करते हुए लेफ्टिनेंट शशिरंजन सुमन ने कहा कि यह उनके जीवन के पूरे 11 वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है, जिसमें 7 साल सैनिक स्कूल के और 4 साल की मिलिट्री ट्रेनिंग शामिल है। उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, चाचा सीताराम महतो, बड़े भाइयों संजय, अजय, आयुष, शिक्षक एवं ‘ट्री मैन’ सुजीत कुमार और अपने पूरे संयुक्त परिवार को दिया।
उन्होंने कहा कि उनके जीवन से जुड़े हर व्यक्ति ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया है और अब उनका एकमात्र लक्ष्य संगठन तथा देश की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरना है। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने उनके उज्ज्वल सैन्य जीवन की मंगलकामना की है।
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