22 साल की उम्र में सुधांशु ने गांव में खड़ा किया बिजनेस का साम्राज्य, लाखों की कमाई और कार के मालिक बनकर पेश की मिसाल व्यापार 3 घंटे पहले 5
जहानाबाद के 22 वर्षीय सुधांशु ने नौकरी की तलाश छोड़कर खेती, पशुपालन और कृषि यंत्रों के व्यवसाय को अपनाकर सालाना लाखों रुपये की कमाई का रास्ता चुना है। उनकी यह अनूठी सफलता आज उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करते हैं।

गांव की मिट्टी से कामयाबी की नई कहानी

आज के दौर में जहां बड़ी संख्या में युवा बेहतर भविष्य और नौकरी की तलाश में अपने गांव को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं जहानाबाद के एक युवा ने अपनी मेहनत से विपरीत दिशा में चलकर सफलता का नया मुकाम हासिल किया है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हुलासगंज प्रखंड का बैगनी गांव आज अपने एक होनहार बेटे सुधांशु कुमार की वजह से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। केवल 22 साल की उम्र में सुधांशु ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जो स्थानीय युवाओं को प्रेरित कर रहा है।

शिक्षा के साथ कारोबार का अनूठा तालमेल

सुधांशु की सफलता का सफर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ शुरू होता है। हाल ही में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने लाइब्रेरी साइंस में भी डिग्री हासिल की है। उनके परिवार की आर्थिक परिस्थितियां ऐसी रही हैं कि उनके पिता और भाई जीविकोपार्जन के लिए बाहर रहते हैं। हालांकि, सुधांशु ने बचपन में ही यह संकल्प ले लिया था कि वे अपने परिवार को उस गरीबी के चक्र से बाहर निकालेंगे जिससे उन्होंने खुद को जूझते देखा था। इसी संकल्प ने उन्हें पढ़ाई के दौरान ही व्यवसाय की ओर मोड़ दिया। आज वे न केवल अपना काम कर रहे हैं, बल्कि अपने साथ गांव के 6 से 7 अन्य लोगों को रोजगार देकर उनकी आजीविका में भी मदद कर रहे हैं।

अनुशासित जीवनशैली और कड़ी मेहनत

सुधांशु की सफलता के पीछे का सबसे बड़ा राज उनकी अनुशासित दिनचर्या है। उनका दिन सुबह ठीक साढ़े तीन बजे शुरू हो जाता है। बिस्तर छोड़ने के बाद अपने दैनिक कार्यों को निपटाकर वे सीधे पशुपालन की गतिविधियों में लग जाते हैं। सुबह छह बजे तक उनके पशुओं की देखरेख और चारा-पानी का काम पूरा हो जाता है। उनके पास इस वक्त गाय और बछड़ों सहित कुल 10 मवेशी हैं, जिन्हें वे अपने बच्चों की तरह पाल रहे हैं। पशुपालन के बाद वे खेती के काम में जुट जाते हैं। मौजूदा रबी सीजन के दौरान वे आलू के खेतों की तैयारी और सरसों की बुआई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में काफी व्यस्त रहते हैं। इतना सब करने के बाद वे अपनी कंप्यूटर क्लास के लिए भी समय निकालते हैं। मछलियों की देखभाल और उन्हें दाना खिलाने का काम भी वे पूरी गंभीरता के साथ खुद ही करते हैं। पिछले 10 वर्षों से वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ इन उद्यमों को निरंतर विकसित करने में जुटे हुए हैं।

कृषि यंत्रों और डेयरी से शानदार आमदनी

सुधांशु का मानना है कि जीवन में जोखिम उठाए बिना सफलता नहीं मिलती। उन्होंने खाली बैठने के बजाय संसाधनों का सही उपयोग करना शुरू किया। आज वे गांवों में कृषि यंत्रों को किराए पर उपलब्ध कराते हैं। आधुनिक हार्वेस्टर के जरिए गेहूं की कटाई और नई मशीनों से धान की रोपाई करवाकर वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। डेयरी व्यवसाय से मिलने वाली आय और कृषि कार्यों में आए आधुनिक बदलावों ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वे अपने दम पर कार के मालिक हैं और अपने घर की पूरी जिम्मेदारी कुशलतापूर्वक उठा रहे हैं। अपने विभिन्न व्यवसायों के जरिए वे सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं। सुधांशु की यह जीवन यात्रा यह प्रमाणित करती है कि यदि व्यक्ति के पास दृढ़ इच्छाशक्ति हो और वह सही दिशा में निरंतर प्रयास करे, तो गांव में रहकर भी तरक्की की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि शहर की नौकरी की दौड़ से बेहतर है कि अपने संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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