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2 घंटे पहले
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एकता कपूर के बयान का पूनम ने किया समर्थन
फिल्म निर्माता एकता कपूर द्वारा हाल ही में हिंदूफोबिया को लेकर दिए गए बयान के बाद बॉलीवुड में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब इस कड़ी में एक्ट्रेस पूनम पांडे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और एकता कपूर का पुरजोर समर्थन किया है। पूनम का कहना है कि लोग अक्सर किसी व्यक्ति के पहनावे या काम को देखकर उनकी धार्मिक मान्यताओं पर उंगली उठाने लगते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। पूनम ने इस बात पर जोर दिया कि एक इंसान का अपने धर्म से जुड़ाव और उसका निजी करियर दो अलग चीजें हैं और उन्हें एक तराजू में तौलना सही नहीं है।
बोल्ड छवि और मंदिर जाने पर लोगों की सोच
पूनम पांडे ने अपने साक्षात्कार में एक बेहद व्यक्तिगत और गंभीर पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह मंदिर जाती हैं, तो उन्हें अक्सर अजीबोगरीब नजरों का सामना करना पड़ता है। लोग उनकी बोल्ड इमेज और कपड़ों को लेकर सवाल उठाते हैं और अक्सर यह टिप्पणी करते हैं कि एक ऐसी महिला, जो बोल्ड कपड़े पहनती है, उसे मंदिर जाने की क्या जरूरत है। पूनम ने ऐसे लोगों से सीधा सवाल किया कि क्या एक अभिनेत्री को मंदिर जाने का हक नहीं है? उन्होंने कहा कि मैं एक कट्टर हिंदू हूं और मुझे हनुमान चालीसा भी आती है, लेकिन मेरी आस्था को मेरे काम के साथ जोड़कर देखना बेहद संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि एकता कपूर अपने धर्म का पालन कर रही हैं, तो इसमें किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
एकता कपूर का पहले का अनुभव
बता दें कि एकता कपूर ने एक पॉडकास्ट के दौरान खुलासा किया था कि उन्हें भी धार्मिक पहचान के कारण ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा था। एकता ने बताया था कि जब वह माथे पर तिलक लगाती थीं या गले में धार्मिक धागा पहनती थीं, तो लोग उन्हें अजीब तरह से देखते थे और कई बार ताने कसते हुए उन्हें तांत्रिक तक कह देते थे। उन्होंने समाज के एक वर्ग की इस सोच पर गंभीर सवाल उठाए थे कि कैसे पौराणिक कहानियों और धार्मिक पहचान को लोग गलत ढंग से पेश करते हैं।
प्रदर्शनों पर पूनम की गहरी चिंता
देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हालिया हालातों को लेकर पूनम पांडे ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान जो हिंसा देखने को मिली है और उसमें छात्रों व पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं, वे बेहद दुखद हैं। पूनम ने कहा कि दोनों ही पक्षों के परिवारों पर क्या बीतती होगी, यह सोचकर ही डर लगता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोगों के मन में पैदा हो रही नफरत भविष्य के लिए बिल्कुल भी शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सलाह दी कि विरोध करने से पहले यह समझना अनिवार्य है कि वे आखिर किस मुद्दे का विरोध कर रहे हैं और उनकी असल मांग क्या है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री पर टिप्पणी
पूनम पांडे ने प्रदर्शनों के दौरान की जा रही मांगों पर भी हैरानी जताई। उन्होंने विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सवाल उठाए। पूनम ने कहा कि आज का दौर ऐसा हो गया है कि बिना किसी ठोस आधार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठा दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेदार पद की गरिमा और महत्व को समझना बेहद जरूरी है। पूनम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कोई भी बिना सोचे समझे किसी का भी इस्तीफा मांग लेता है, क्या यह महज एक मजाक बनकर रह गया है? उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी ने एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया था और मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में भी इसी तरह का विरोध दर्ज कराया गया था, जिसके बाद कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था।
इमरान खान को दी नसीहत
अभिनेता इमरान खान को लेकर पूछे गए सवाल पर पूनम ने स्पष्ट राय दी। इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के निर्देश मिलने के मामले पर पूनम ने कहा कि वह उन्हें एक शानदार कलाकार मानती हैं और उनके प्रति मन में सम्मान भी है। हालांकि, उन्होंने एक सख्त नसीहत देते हुए कहा कि यदि आप अमेरिकी नागरिक हैं, तो आपको भारत के आंतरिक मामलों या देश की चीजों में दखल नहीं देना चाहिए। पूनम ने कहा कि वैसे भी देश में पहले से ही काफी ड्रामा चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 अक्टूबर को अगस्त क्रांति मैदान में इमरान खान के शामिल होने के बाद ही मुंबई पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर देश छोड़ने के निर्देश दिए थे। पूनम ने इन सब पर अपनी नाराजगी जताते हुए इंसानियत को सबसे ऊपर रखने की अपील की है।
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