बैंगन की खेती का कमाल: सिर्फ 70 दिन में तैयार होती है फसल, लाखों में कमा रहे हैं गोंडा के किसान व्यापार 2 महीने पहले 87
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर बैंगन की व्यावसायिक खेती अपनाई है, जिससे उन्हें हर साल लाखों की कमाई हो रही है।

खेती में बदलाव की अनूठी पहल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के रहने वाले नान बाबू गोस्वामी ने खेती के पारंपरिक तौर तरीकों से आगे बढ़कर एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक फसलों को छोड़कर बैंगन की खेती शुरू की है। उनकी इस पहल ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया है बल्कि आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। वे अब सब्जी उत्पादन के माध्यम से अपने परिवार के लिए बेहतर आय का जरिया बना चुके हैं।

सफलता की राह और प्रेरणा

नान बाबू गोस्वामी ने अपनी आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूरी तरह से खेती को ही अपना करियर बना लिया। उन्होंने बताया कि उन्हें बैंगन की खेती करने का विचार बलरामपुर के एक किसान को देखकर आया था। इसके बाद उन्होंने पानी संस्थान से जुड़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की बारीकियां सीखीं। आज वे लगभग 15 बिस्वा जमीन पर उन्नत किस्म के बैंगन उगा रहे हैं और कम लागत में शानदार मुनाफा हासिल कर रहे हैं।

खेती की तकनीक और प्रबंधन

अपनी सफलता का श्रेय देते हुए नान बाबू गोस्वामी ने बताया कि बाजार में बैंगन की मांग साल भर बनी रहती है, यही कारण है कि उन्होंने इसकी खेती को बड़े पैमाने पर करने का निर्णय लिया। फसल तैयार करने के लिए उन्होंने सबसे पहले खेत की गहरी और बेहतर जुताई की। इसके बाद उन्होंने सही किस्म के बीजों का चयन किया। खेती के दौरान समय पर सिंचाई, निराई और गुड़ाई करने के साथ ही पौधों के रख-रखाव पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। उनके अनुसार यदि सही वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए तो छोटे से खेत के टुकड़े से भी बड़ी आय प्राप्त की जा सकती है।

कमाई और उत्पादन का गणित

बैंगन की खेती को लेकर गोस्वामी ने बताया कि यह फसल बुवाई के महज 70 से 90 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार फसल तैयार होने के बाद कई महीनों तक इसकी निरंतर तुड़ाई की जा सकती है। इस नियमित उत्पादन के कारण उन्हें स्थानीय मंडियों और आसपास के बाजारों में लगातार ग्राहक मिलते रहते हैं, जिससे उनकी आय का प्रवाह बना रहता है।

निवेश और भविष्य की संभावनाएं

आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस फसल को तैयार करने में उनकी लागत बहुत कम आई है, जो कि मात्र 2,000 से 2,500 रुपये के बीच रही है। वहीं अगर मुनाफे की बात करें तो उन्हें इस एक फसल से 50,000 से 60,000 रुपये की आमदनी होने की पूरी उम्मीद है। वे स्पष्ट करते हैं कि यदि फसल की गुणवत्ता उच्च स्तर की बनी रहती है तो व्यापारी स्वयं अच्छे दाम देने के लिए तैयार रहते हैं, जिससे उनकी कुल कमाई लाखों रुपये के आंकड़े तक आसानी से पहुंच जाती है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कम क्षेत्रफल में भी कृषि को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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