किसान के बेटे ने बढ़ाया मान, MPPSC खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा में हासिल की चौथी रैंक व्यापार 2 घंटे पहले 2
छतरपुर जिले के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले धरवेंद्र सिंह राजपूत ने अपनी मेहनत के दम पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी की परीक्षा में पूरे मध्य प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। सरकारी नौकरी में कार्यरत रहने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।

सफलता की नई कहानी

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। इस परीक्षा में छतरपुर जिले के रहने वाले धरवेंद्र सिंह राजपूत ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने पूरे मध्य प्रदेश में चौथी रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। धरवेंद्र की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने नौकरी के साथ-साथ इस कठिन परीक्षा की तैयारी की और उसे क्रैक किया।

साधारण किसान परिवार से ताल्लुक

धरवेंद्र सिंह राजपूत मूल रूप से छतरपुर जिले के लवकुश नगर के पास स्थित पठा गांव के निवासी हैं। उनके पिता भरत सिंह राजपूत और माता विनाई देवी राजपूत खेती-किसानी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। धरवेंद्र बताते हैं कि उनका बचपन खेती के माहौल में ही बीता और किसानी उनका पैतृक पेशा रहा है। घर में माता-पिता के अलावा उनके छोटे भाई और छोटी बहन हैं। उनकी बहन का विवाह हो चुका है, जबकि धरवेंद्र अभी अविवाहित हैं और अपने परिवार के साथ रहते हैं।

शिक्षा का सफर और संघर्ष

धरवेंद्र की शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई, जहाँ उन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने 9वीं और 10वीं की पढ़ाई मरिया माता प्राइवेट स्कूल से की। अपनी उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कृषि संकाय को चुना और 11वीं-12वीं की पढ़ाई छतरपुर के सरकारी स्कूल से पूरी की। कृषि के क्षेत्र में रुचि होने के कारण उन्होंने प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (PAT) की परीक्षा दी, जिसमें उन्हें पूरे मध्य प्रदेश में 5वीं रैंक मिली। इसके बाद उन्होंने जबलपुर स्थित कृषि कॉलेज से बीएससी कृषि विज्ञान की डिग्री हासिल की।

नौकरी के साथ जारी रही पढ़ाई

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए धरवेंद्र कहते हैं कि कॉलेज के दिनों से ही उनका झुकाव एमपीपीएससी (MPPSC) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरफ था। उनके कई सीनियर अधिकारी बन चुके थे, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली। साल 2022 में वह कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए और वर्तमान में छतरपुर जिले के गौरिहार कृषि विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर दिन 5 से 6 घंटे का समय पढ़ाई के लिए निकाला। वे बताते हैं कि वे नौकरी के दौरान घर से नोट्स की फोटोकॉपी या तस्वीरें अपने साथ ले जाते थे, ताकि ड्यूटी से खाली समय मिलने पर उनका उपयोग कर सकें।

विभिन्न परीक्षाओं में हासिल की कामयाबी

धरवेंद्र की सफलता का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने साल 2017 में एमपी पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। साथ ही उन्होंने AFO (Agriculture Field Officer) की परीक्षा भी पास की, हालांकि उस समय उनकी डिग्री पूरी नहीं थी। साल 2019 में उन्होंने एमपीपीएससी राज्य सेवा और वन विभाग (फॉरेस्ट) की मुख्य परीक्षा भी दी थी, लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद साल 2022 में कृषि विस्तार अधिकारी के रूप में चयन हुआ, जहाँ उन्होंने 39वीं रैंक प्राप्त की थी। अब खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनकर वे अपनी मेहनत से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

परीक्षा और चयन प्रक्रिया

खाद्य सुरक्षा अधिकारी 2025 की चयन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया ने धैर्य की परीक्षा ली। इसकी मुख्य परीक्षा 14 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई थी। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों के लिए 21 जनवरी 2026 को अगला चरण तय किया गया। इसके बाद इंटरव्यू का दौर 15 अप्रैल 2026 से लेकर 24 अप्रैल 2026 तक चला। लंबी प्रक्रिया के बाद 22 जून 2026 को अंतिम परिणाम जारी हुआ, जिसमें धरवेंद्र ने प्रदेश में चौथी स्थान बनाकर इतिहास रच दिया।

श्वेता भाटिया पाबना की बिजनेस फीचर लेखिका हैं, जो सक्सेस स्टोरी और कारोबारी फीचर लिखती हैं। उद्यमियों के संघर्ष, नए कारोबारी मॉडल और प्रेरक कहानियों को वे रोचक अंदाज में पेश करती हैं। उनका लेखन पाठकों को प्रेरणा और जानकारी दोनों देता है।

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