पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल: छपरा के 10 छात्रों ने सजावट के काम से खड़ा किया 3 लाख का साम्राज्य व्यापार 5 घंटे पहले 11
छपरा के विशनपुर गांव के 10 छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ शादी-समारोहों में सजावट का काम कर रहे हैं और अब तक 3 लाख रुपये से अधिक का कारोबार खड़ा कर चुके हैं।

पढ़ाई के साथ कमाई का अनोखा मॉडल

बिहार के छपरा जिले से युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जलालपुर प्रखंड स्थित विशनपुर गांव के 10 छात्रों ने एक ऐसा रास्ता चुना है, जिसने न केवल उनकी आर्थिक समस्याओं को दूर किया है, बल्कि उन्हें पढ़ाई के दौरान स्वावलंबी भी बना दिया है। ये सभी विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में सजावट का पार्ट-टाइम काम कर रहे हैं। इस छोटे से प्रयास ने देखते ही देखते एक बड़े व्यवसाय का रूप ले लिया है और अब ये छात्र 3 लाख रुपये से अधिक की कुल संपत्ति वाले कारोबार के मालिक बन गए हैं।

कैसे मिली कारोबार की प्रेरणा

इस पूरे उद्यम की नींव सुनील कुमार शाह की एक छोटी सी सोच ने रखी थी। एक बार जब सुनील अपने मित्र के साथ एक शादी समारोह में पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां सजावट करने वाले लोगों के काम करने के तरीके और उनकी आमदनी को गौर से देखा। उन्होंने पाया कि केवल दो से तीन घंटे के काम के बदले में उन कारीगरों को अच्छी-खासी रकम मिल रही है। यह देखकर सुनील के मन में ख्याल आया कि जब यह काम मेहनत से किया जा सकता है, तो क्यों न पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी इसे एक अवसर के रूप में अपनाएं। सुनील को खुद भी सजावट की कला आती थी, इसलिए उन्होंने अपने अन्य नौ दोस्तों को इस विचार से जोड़ा और एक टीम का गठन किया।

सजावट का काम और विस्तार

विशनपुर के इन युवाओं का समूह अब शादी-विवाह में विभिन्न प्रकार के सजावट कार्य बखूबी निभाता है। इनमें मुख्य रूप से दूल्हे की गाड़ी की सजावट, जयमाला स्टेज को आकर्षक रूप देना, मंडप सजाना और हल्दी समारोह जैसे कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है। अपनी मेहनत, लगन और बेहतरीन रचनात्मकता के कारण इन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू की। शुरुआती दौर में छोटे स्तर पर काम करने के बाद, अब इनके पास 3 लाख रुपये से अधिक की कीमत का आधुनिक सजावट सामान मौजूद है। इस सामान के दम पर अब वे न केवल अपने गांव बल्कि आसपास के पूरे जिले में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

सीजन में बढ़ी काम की मांग

सुनील कुमार शाह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले दो वर्षों से अपने साथियों के साथ पूरी ईमानदारी से यह काम कर रहे हैं। उनके ग्रुप में शामिल सभी 10 सदस्य पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं और खाली समय में इस कारोबार को संभालते हैं। अपनी कम कीमत और उच्च गुणवत्ता वाली सजावट के लिए वे क्षेत्र में काफी मशहूर हो चुके हैं। शादी-ब्याह के सीजन में उनके पास इतने ऑर्डर आ जाते हैं कि उन्हें अपने काम को पूरा करने के लिए काफी भाग-दौड़ करनी पड़ती है। सुनील के अनुसार, सीजन के दौरान हालात ऐसे हो जाते हैं कि कभी-कभी तो उन्हें ठीक से भोजन करने का भी वक्त नहीं मिल पाता, क्योंकि वे अपने ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव देने में जुटे रहते हैं।

भविष्य के लिए एक उदाहरण

ये छात्र आज न केवल अपना शैक्षिक खर्च खुद उठा रहे हैं, बल्कि अपने परिवारों के लिए भी आर्थिक सहारा बने हुए हैं। पढ़ाई और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाने की उनकी यह कला अन्य युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में इच्छाशक्ति हो, तो छोटे निवेश और सही दिशा में की गई मेहनत से बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप