कभी जेब में नहीं थे पैसे, आज 40000 रुपये कमा रही हैं रांची की दुलारी, जानें प्रेरणादायक सफर व्यापार एक घंटा पहले 2
राजस्थान से रांची आकर एक महिला ने किस तरह आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है, यह कहानी उसी जज्बे की है। वंदना सहायता समूह से जुड़कर दुलारी आज न केवल खुद कमा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली दुलारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली दुलारी आज रांची के एक गांव में रहती हैं और अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। एक ऐसा समय था जब दुलारी के पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए 1 रुपये भी नहीं थे। हालांकि, वंदना सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी किस्मत और जिंदगी दोनों ने करवट ले ली। आज वह हर महीने 40,000 रुपये की कमाई कर रही हैं।

कौशल विकास और आत्मनिर्भरता

दुलारी के मुताबिक, वंदना सहायता समूह का हिस्सा बनने के बाद उन्हें सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इस प्रशिक्षण ने उन्हें 20 से 25 तरह के अलग-अलग उत्पाद बनाने में माहिर बना दिया। दुलारी बताती हैं कि पहले वह घूंघट की आड़ में रहती थीं और घर की चारदीवारी से बाहर कदम रखने में भी संकोच करती थीं। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना उनकी मजबूरी थी। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल अलग है। कौशल सीखने के बाद वह पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं।

उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला

दुलारी और उनके समूह द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों की सूची काफी लंबी है। वे घर पर ही शुद्धता के साथ कई तरह की चीजें तैयार करती हैं। उनके उत्पादों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • हैंड वॉश और डिजाइनर साबुन
  • हर्बल शैंपू और हेयर ऑयल
  • हर्बल फेस वॉश
  • विभिन्न प्रकार के मसाले
  • मिक्सचर और नमकीन

खास बात यह है कि उनके द्वारा बनाए जाने वाले डिजाइनर साबुन ग्राहकों को काफी आकर्षित करते हैं, जिनमें गुलाब और कमल के फूलों के आकार शामिल हैं। ये सभी उत्पाद बिना किसी बाहरी सहायता के घरेलू स्तर पर पूरी गुणवत्ता के साथ बनाए जाते हैं।

बाजार और बिक्री का विस्तार

दुलारी अपनी सफलता का श्रेय सही मार्केटिंग और सरकारी सहयोग को देती हैं। वह अपने उत्पादों को इंडियामार्ट जैसे डिजिटल मंचों पर बेचती हैं, जहां से उन्हें नियमित रूप से बड़े ऑर्डर मिलते हैं। इसके अलावा, सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाले मेलों में उन्हें स्टॉल लगाने की मुफ्त सुविधा मिलती है, जो उनकी बिक्री बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होती है। आज उनके बनाए उत्पादों की मांग केवल रांची तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पटना से लेकर उत्तर प्रदेश तक के विभिन्न क्षेत्रों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं।

महिलाओं का सामूहिक सशक्तिकरण

इस बदलाव का असर केवल दुलारी तक ही सीमित नहीं है। उनके साथ 4 अन्य महिलाएं भी काम कर रही हैं, जिनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। दुलारी बताती हैं कि वे सभी मिलकर एक टीम की तरह काम करती हैं और जहां भी जाती हैं, एक साथ जाती हैं। अपनी आत्मनिर्भरता पर गर्व करते हुए वह कहती हैं कि जो महिला कभी घर की दहलीज नहीं लांघती थी, वह आज दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की यात्राएं कर रही हैं। अपने पैरों पर खड़े होकर और आर्थिक आजादी हासिल कर दुलारी ने साबित कर दिया है कि लगन और सही मार्गदर्शन हो तो गरीबी को हराकर सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप