डोनाल्ड ट्रंप का तुर्की दौरा: कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के डर से क्यों छोड़ना पड़ा एयर फोर्स वन विश्व 2 घंटे पहले 4
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी तुर्की यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से अपना मुख्य विमान एयर फोर्स वन छोड़कर एक छोटे विमान में सफर करना पड़ा था। सीक्रेट सर्विस ने कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के खतरे को भांपते हुए यह कदम उठाया था।

सुरक्षा का कड़ा पहरा और मिसाइल का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान एक ऐसी स्थिति पैदा हुई जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी थीं। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की में यात्रा के अंतिम चरण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य विमान एयर फोर्स वन को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाए जाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था। यह वह समय था जब क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल था और सुरक्षा के लिहाज से किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

सीक्रेट सर्विस की सख्त चेतावनी

अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने इस खतरे को तत्काल और अत्यंत गंभीर माना था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को ऐसा अंदेशा हुआ था कि राष्ट्रपति के विमान पर हमला हो सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए, सुरक्षा टीम के पास कोई भी बड़ा जोखिम लेने की गुंजाइश नहीं थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस खतरे की सूचना मिलते ही अधिकारियों के पास सुरक्षित विकल्प तैयार करने के लिए बहुत ही कम समय बचा था, जिसके बाद उन्होंने बेहद गुप्त तरीके से योजना में बदलाव किया।

एयर फोर्स वन को छोड़ छोटे विमान का सहारा

इस घटना की शुरुआत 8 जुलाई को हुई, जब तुर्की से रवानगी का समय नजदीक था। डोनाल्ड ट्रंप और उनके कुछ करीबी सहयोगियों ने एयर फोर्स वन का उपयोग करने के बजाय, चुपचाप एक छोटे C-32A विमान में शिफ्ट होने का निर्णय लिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस विमान तक पहुंचने के लिए ट्रंप ने कैटरिंग वाले फूड ट्रक का इस्तेमाल किया, ताकि उनकी गतिविधियों को सार्वजनिक न किया जा सके। जबकि राष्ट्रपति एक छोटे विमान में सवार होकर निकले, वहीं दूसरी तरफ एयर फोर्स वन को व्हाइट हाउस के वरिष्ठ कर्मचारियों, अन्य अधिकारियों और मीडियाकर्मियों के साथ अलग से रवाना किया गया।

तनाव के बीच नाटो शिखर सम्मेलन

यह पूरा वाकया अंकारा दौरे के दौरान तब पेश आया, जब तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा था। उस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर थे। हालांकि, रॉयटर्स के सूत्रों ने यह स्पष्ट किया है कि हमले की कोई पुख्ता या पूर्व-नियोजित साजिश सामने नहीं आई थी, लेकिन राष्ट्रपति को निशाना बनाने की मंशा और संभावित संकेतों को देखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दोनों विमानों को अलग-अलग मार्ग और तरीके से उड़ान भरने के लिए कहा गया था ताकि किसी भी संभावित हमले को विफल किया जा सके।

डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दी पुष्टि

इस मामले पर खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। मंगलवार को उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि सीक्रेट सर्विस ने उन्हें सुरक्षा कारणों से विमान बदलने का विशेष सुझाव दिया था। ट्रंप ने अपने बयान में कहा, मुझे लगता है कि असल में जिस छोटे विमान में मैं उड़ा था, उस पर खतरा अधिक था। हालांकि, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिस विमान को छोड़ा गया था, शायद हमलावर उसी को निशाना बनाने की अधिक कोशिश करते। उन्होंने इस दौरान कोई ठोस सबूत तो पेश नहीं किए, लेकिन विमान बदलने की घटना को उन्होंने स्वीकार किया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस पूरी घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंधन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें, जिन्हें पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम भी कहा जाता है, किसी भी वीआईपी विमान के लिए बड़ा सिरदर्द हो सकती हैं। तुर्की में हुआ यह वाकया अब दुनिया भर के सुरक्षा जानकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि किस तरह एक शक्तिशाली राष्ट्रपति को भी अपनी सुरक्षा के लिए सामान्य प्रोटोकॉल से हटकर गुप्त रास्तों और छोटे विमानों का सहारा लेना पड़ा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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