व्यापार
एक घंटा पहले
4
विचारों
सोशल मीडिया बना रोजगार का नया जरिया
आज के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है। इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म कई लोगों के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। बिहार के समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड क्षेत्र के रहने वाले दीपू कुमार ने इसी डिजिटल क्रांति का फायदा उठाया है। उन्होंने यूट्यूब के जरिए बत्तख पालन की बारीकियां सीखीं और आज वह इसे एक सफल व्यवसाय के रूप में चला रहे हैं। नंदनी लगुनिया रेलवे स्टेशन के पास स्थित उनका फार्म इस बात का प्रमाण है कि यदि सही जानकारी और मेहनत हो, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है।
मुर्गी पालन से बत्तख पालन तक का सफर
दीपू कुमार बताते हैं कि बत्तख पालन से जुड़ने से पहले वह मुर्गी पालन का व्यवसाय करते थे। हालांकि, उस व्यवसाय में उन्हें उतनी आमदनी नहीं हो रही थी, जितनी उन्होंने उम्मीद की थी। इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर बत्तख पालन से जुड़े कई वीडियो देखे। उन वीडियो से प्रभावित होकर और पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने मुर्गी फार्म को छोड़कर बत्तख पालन का निर्णय लिया। आज उनका यह निर्णय काफी लाभदायक साबित हो रहा है। तमाम खर्च निकालने के बाद, दीपू कुमार हर महीने 70,000 रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
सावधानी और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान
दीपू का कहना है कि बत्तख पालन दिखने में जितना सरल लगता है, वास्तव में उतनी ही बारीकी और देखरेख की मांग भी करता है। बत्तखों को स्वस्थ रखने के लिए वह सुबह और शाम नियमित रूप से दाना-पानी देने की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाते हैं। स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि बत्तखों में अक्सर सांस संबंधी परेशानियां या पंखों से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिनका समय पर उपचार करना बेहद आवश्यक है। संक्रमण को रोकने के लिए वह हफ्ते में दो दिन फार्म की पूरी तरह सफाई करते हैं और कीटाणुओं से बचने के लिए चूने का छिड़काव भी सुनिश्चित करते हैं।
फार्म का प्रबंधन और निवेश
वर्तमान में दीपू कुमार के फार्म में कुल 1350 बत्तख मौजूद हैं। इससे पहले उनके पास बत्तखों की संख्या करीब 2000 तक पहुंच गई थी, लेकिन उनमें से अतिरिक्त नर बत्तखों को उन्होंने बेच दिया था। उनका मुख्य ध्यान अंडा उत्पादन पर है, जिसके कारण वह मादा बत्तखों की संख्या को अधिक बनाए रखते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 2000 बत्तखों के बच्चों को तैयार करने में करीब 1,00,000 रुपये का शुरुआती खर्च आया था। वहीं, रोजाना के रखरखाव और दाने पर करीब 9,000 रुपये का खर्च आता है।
अंडे की बिक्री से हो रही बंपर कमाई
बत्तख पालन में मुनाफे का मुख्य स्रोत उनके अंडे हैं। दीपू के मुताबिक, वर्तमान में हैचरी में एक बत्तख का अंडा 11.50 रुपये की दर से बिक रहा है। उनके फार्म से उत्पादित अंडे न केवल समस्तीपुर के स्थानीय बाजार में खपत होते हैं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों तक भी भेजे जाते हैं। यहां तक कि उनके फार्म के अंडे सिक्किम तक पहुंचाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय हैचरियों में भी वे अंडे की आपूर्ति करते हैं। अंडे देने की अवधि पूरी हो जाने के बाद, अंत में बत्तखों को मांस के लिए भी बेचा जाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है। दीपू की यह सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो कम संसाधनों में भी बड़ा व्यवसाय खड़ा करने की इच्छा रखते हैं।
Comments
0 comment