गोंडा के आकाश ने बीएससी एग्रीकल्चर के बाद चुनी गेंदे की खेती, सालाना 7 लाख तक की कमाई व्यापार एक महीने पहले 29
गोंडा के युवा किसान आकाश वर्मा ने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के बाद आधुनिक तरीके से गेंदे के फूलों की खेती शुरू की और आज इससे सालाना 6 से 7 लाख रुपए तक की आमदनी कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवा किसान ने गेंदे के फूलों की खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना ली है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्होंने फूलों की बागवानी को अपनाया और आज इसी से अच्छी कमाई कर रहे हैं। उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी अब फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

साल भर बनी रहती है गेंदे की मांग

प्रगतिशील किसान आकाश वर्मा ने बताया कि गेंदे के फूल की मांग पूरे साल बनी रहती है। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, पूजा-पाठ और तमाम दूसरे कार्यक्रमों में गेंदे के फूलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि बाजार में इन फूलों की अच्छी कीमत मिलती है और किसानों को बेहतर मुनाफा होता है।

एग्रीकल्चर की पढ़ाई के बाद खेती को बनाया करियर

आकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह डिफेंस की तैयारी में जुटे थे, लेकिन कुछ कारणों से उनका चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने खेती को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया और आधुनिक तरीके से गेंदे के फूलों की खेती शुरू कर दी।

वह पूरे साल गेंदे के फूल का उत्पादन करते हैं। इसके लिए वह अलग-अलग खेतों में अलग-अलग समय पर पौधों की रोपाई करते रहते हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद लगभग चार से पांच महीने तक लगातार फूल मिलते रहते हैं। इसी योजना के तहत वह हर महीने नए पौधे लगाते हैं, जिससे साल भर फूलों की आपूर्ति बनी रहती है और बाजार की मांग भी पूरी होती रहती है।

आठ बीघा में खेती, साल भर का इंतजाम

आकाश ने बताया कि इस समय वह लगभग 8 बीघा में गेंदे के फूलों की खेती कर रहे हैं। इसमें से चार बीघा की फसल तैयार है और उसकी तुड़ाई चल रही है, जबकि बाकी चार बीघा की फसल अभी तैयार हो रही है, जिसकी तुड़ाई सावन मास में शुरू हो जाएगी।

लागत कम, मुनाफा कई गुना

आकाश वर्मा के मुताबिक आठ बीघा गेंदे के फूल की खेती में करीब 30 से 40 हजार रुपए की लागत आती है। वहीं इस खेती से उन्हें सालाना 6 से 7 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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