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एक घंटा पहले
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विचारों
कोरोना काल में बुनी सफलता की इबारत
बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले एक युवा ने साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है। अभिमन्यु नाम के इस युवक ने कोरोना महामारी के कठिन समय के दौरान जब पूरी दुनिया थम सी गई थी, तब अपने भविष्य के लिए एक नई राह चुनी। उन्होंने अपने भाई के एक छोटे से सुझाव पर अमल करते हुए कपड़ों का अपना कारखाना शुरू करने का निर्णय लिया। आज उनका यह उद्यम एक मिसाल बन चुका है।
महज 3 लाख रुपये से रखी नींव
अभिमन्यु ने अपने इस व्यापार की शुरुआत सितंबर 2020 में की थी। उस समय उनके पास निवेश के लिए लगभग 3 लाख रुपये की पूंजी थी। इतने सीमित संसाधनों के साथ उन्होंने जहानाबाद में कपड़ों की एक निर्माण इकाई स्थापित की। शुरुआत में काम का स्तर छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बाजार की मांग को समझते हुए अपने उत्पादन को बढ़ाया। आज उनके काम को शुरू हुए करीब 6 साल बीत चुके हैं और इस दौरान उन्होंने अपनी मेहनत से पूरे इलाके में एक अलग पहचान बना ली है।
उत्पादन का दायरा और उत्पादों की विविधता
अभिमन्यु की इस यूनिट में आज हर महीने 60 से 70 हजार पीस कपड़ों का निर्माण किया जाता है। उनके कारखाने में महिलाओं और पुरुषों के लिए टी-शर्ट, ट्राउजर, पैंट, कुर्तियां और सलवार-सूट जैसे परिधान तैयार किए जाते हैं। मौसम के अनुसार भी उनके काम में बदलाव आता है। उदाहरण के लिए, वर्तमान में सर्दी के सीजन को देखते हुए उनकी यूनिट में ऊनी सलवार-सूट, कुर्ती-पायजामा और स्वेटरों की सिलाई का काम जोर-शोर से चल रहा है। इसके अलावा, स्कूल ड्रेस के निर्माण में भी उनकी इकाई सक्रिय रहती है।
क्षेत्रीय बाजारों में फैल चुका है कारोबार
अभिमन्यु का यह बिजनेस केवल जहानाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका तैयार किया हुआ माल पटना, गया, अरवल, नालंदा और नवादा जैसे आसपास के प्रमुख जिलों के बाजारों में भी भेजा जाता है। इस निरंतर बढ़ते काम का ही परिणाम है कि आज उनका वार्षिक टर्नओवर 30 लाख से 40 लाख रुपये के बीच पहुंच चुका है। उनके व्यवसाय में आई इस तेजी का मुख्य श्रेय उनकी दूरदर्शिता और लगातार बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता को जाता है।
रोजगार के अवसर और युवाओं के लिए संदेश
इस व्यवसाय के माध्यम से अभिमन्यु ने खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाया है। फिलहाल उनकी फैक्ट्री में 8 से 10 लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। अभिमन्यु का मानना है कि नौकरी के अवसर सीमित हैं, लेकिन स्वरोजगार के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं छिपी हुई हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने काम को बड़े स्तर तक ले जाने में सफलता पाई है। उद्योग विभाग से प्राप्त लोन ने भी उन्हें अपनी यूनिट का विस्तार करने में बड़ी मदद की है।
युवाओं को प्रेरित करते हुए उनका कहना है कि वे हाथ पर हाथ धरे न बैठें और कुछ नया करने की सोच रखें। सरकार की ओर से ऐसे उद्यमियों को हर संभव सहायता मिलती है, बस जरूरत है तो एक सही पहल करने की। उनकी यह यात्रा बताती है कि आपदा के समय भी अगर सही अवसर की तलाश की जाए, तो एक छोटी सी शुरुआत भी भविष्य में बड़े साम्राज्य की नींव रख सकती है।
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