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एक घंटा पहले
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केला एक ऐसा पौधा है जिसे सिर्फ फल की उपज तक सीमित मानना सही नहीं है। इसके फल, पत्ते और रेशे, तीनों से अलग-अलग तरह के कारोबार खड़े किए जा सकते हैं। रेशे से बनने वाली टोपी, बैग, मोबाइल कवर और सजावटी सामान जैसे उत्पादों की देश ही नहीं विदेश में भी अच्छी मांग है, जिससे किसानों और नए उद्यमियों के लिए यह कमाई का बेहतरीन रास्ता बन सकता है।
बुरहानपुर में केले का बड़ा दायरा
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में करीब 25000 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती होती है। यही वजह है कि यहां केले से जुड़ा कच्चा माल आसानी से उपलब्ध है। केले के पत्ते का इस्तेमाल पत्तल के रूप में भोजन परोसने में होता है, फल बाजार में बिकता है और इसके रेशे से कई तरह की वस्तुएं तैयार की जाती हैं। इसके अलावा केले का पाउडर और चिप्स भी बनाकर बेचे जा सकते हैं।
एक पौधे से दर्जनभर से ज्यादा कारोबार
विशेषज्ञ किसान सुनील महाजन के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करना चाहता है तो केला इसके लिए बेहतरीन विकल्प है। उनका कहना है कि केले के एक ही पौधे से एक दर्जन से अधिक तरह के व्यवसाय किए जा सकते हैं। फल बेचने के साथ-साथ इसके पत्ते भी बिकते हैं और रेशे से तैयार उत्पादों का अलग कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
उनके मुताबिक केले के रेशे से टोपी, मोबाइल कवर और पानी की बोतल तक बनाई जा रही है, जबकि खेल-खिलौनों से जुड़े आइटम भी इससे तैयार होते हैं। अब तो रेशे से घड़ियां भी बनने लगी हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा साड़ियां भी इसी रेशे से तैयार की जा सकती हैं।
₹100000 से शुरुआत संभव
इस काम से जुड़ी विशेषज्ञ सुनंदा बाई बताती हैं कि अगर कोई केले के रेशे से टोपी, राखियां या दूसरे उत्पाद बनाना चाहता है तो यह कारोबार ₹100000 की लागत से शुरू किया जा सकता है। उनका कहना है कि केला ऐसा फल है जिसका तना तक बिकता है और बुरहानपुर जिले में यह आसानी से मिल जाता है।
जिले में 25000 हेक्टेयर में केले की खेती होने के कारण कच्चे माल की कमी नहीं रहती। इस कारोबार के जरिये हर महीने 10 से 15000 रुपये की कमाई की शुरुआत हो सकती है, जिसे आगे चलकर और बड़ा बनाया जा सकता है।
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