बदलती कहानी या नए किरदार: 'अनुपमा' और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' की टीआरपी आखिर क्यों लुढ़क रही है? मनोरंजन एक घंटा पहले 2
कभी टीआरपी चार्ट पर राज करने वाले 'अनुपमा' और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' अब रैंकिंग में नीचे खिसक गए हैं, जबकि जी टीवी के नए शोज ने टॉप तीन पोजीशन पर कब्जा जमा लिया है। जानिए इन दिग्गज सीरियल्स की गिरती रेटिंग के पीछे की चार बड़ी वजहें।

भारतीय टेलीविजन पर 'ये रिश्ता क्या कहलाता है', 'अनुपमा' और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' लंबे समय से दर्शकों के बीच सबसे चर्चित नामों में गिने जाते रहे हैं। ये शोज मनोरंजन के मामले में कोई कमी नहीं छोड़ते, लेकिन दर्शकों की पसंद रोज बदलती रहती है और इसका सीधा असर शोज की टीआरपी पर पड़ता है।

किसी शो को कितने लोग देख रहे हैं, यही टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स से तय होता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मेकर्स यह फैसला लेते हैं कि कहानी या कलाकारों में कोई बदलाव किया जाए या नहीं। हालांकि कई बार कहानी और कास्ट बदलने के बाद भी रेटिंग में सुधार नहीं हो पाता। अच्छी टीआरपी न मिल पाने के चलते 'दो दुनिया एक दिल', 'गुम है किसी के प्यार में 2' और 'डोरी 2' जैसे कई शोज बंद हो चुके हैं।

अनुपमा और तुलसी के सीरियल में नहीं रहा वो दम

रुपाली गांगुली और स्मृति ईरानी टीवी की वे चर्चित अभिनेत्रियां हैं जिनका हर सीरियल लोगों के बीच खूब बात बनता है। अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतना उन्हें बखूबी आता है, लेकिन इन दिनों इन टॉप एक्ट्रेस के शोज दर्शकों को खास पसंद नहीं आ रहे, जिसका असर रेटिंग पर साफ दिख रहा है। 'अनुपमा' और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' की गिरती टीआरपी के पीछे चार बड़ी वजहें मानी जा रही हैं।

टीआरपी गिरने की चार बड़ी वजहें

1. नए शोज से कड़ी टक्कर

लेटेस्ट BARC रेटिंग्स के मुताबिक नए शोज के दर्शकों की संख्या बढ़ने से इन दोनों सीरियल की रैंकिंग पर बुरा असर पड़ रहा है और यही टीआरपी गिरने की बड़ी वजह बन रहा है। इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों के कारण हिंदी सीरियल की व्यूअरशिप घट गई थी।

2. एक जैसी कहानी से बोरियत

'अनुपमा' में बार-बार उसकी लव लाइफ को दिखाया जा रहा है, जिससे दर्शक ऊब चुके हैं और सोशल मीडिया पर शो को बंद करने तक की मांग उठने लगी है। लीप के बाद भी कहानी में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला। दूसरी ओर, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के हर एपिसोड में पारिवारिक झगड़ों और ड्रामैटिक ट्विस्ट पर जोर दिया गया है। टीआरपी बढ़ते ही पुराने किरदारों की एंट्री कराई गई, लेकिन कहानी फिर अतीत में अटक गई और वही उबाऊ ट्रैक दोहराया जाने लगा।

3. लगातार बदलती कास्ट

दर्शक अक्सर अचानक आने वाले लीप, बीच में अधूरी छूटी कहानी, किरदारों की अदला-बदली और पुराने सोप-ओपेरा वाले घिसे-पिटे तरीकों से खुश नहीं हैं। 'अनुपमा' की तरह 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के मेकर्स ने भी टीआरपी बनाए रखने के लिए पुराने किरदार की वापसी का दांव खेला, जो गलत साबित हुआ। पहले सीजन में अंश की मौत दिखाई गई थी, लेकिन उसी एक्टर को तुलसी का पोता बनाकर दोबारा कहानी में फिट करने की कोशिश की गई। ऐसे में दर्शकों को शो से जोड़े रखना मुश्किल हो गया है।

4. दर्शकों की बदलती पसंद

दर्शक अब नए अंदाज की कहानियों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं और यही नयापन इन दिनों 'वसुधा', 'तुम से तुम तक' और 'गंगा माई की बेटियां' में नजर आ रहा है। वहीं उबाऊ कहानी और बेमतलब के बदलावों के कारण 'अनुपमा' और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' जैसे लोकप्रिय सीरियल टीआरपी चार्ट में नीचे खिसकते जा रहे हैं।

21वें हफ्ते की टीआरपी में कौन कहां

इस हफ्ते की रेटिंग में जी टीवी के तीन शोज ने टॉप तीन पोजीशन पर कब्जा जमा लिया है। 'वसुधा' 1.9 के साथ पहले नंबर पर बना हुआ है और अपना दबदबा कायम रखे है। 'तुम से तुम तक' 1.8 के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि 'गंगा माई की बेटियां' भी 1.8 के साथ तीसरे नंबर पर है।

कई हफ्तों तक टॉप दावेदारों में बने रहने के बाद 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' 1.6 के साथ चौथे स्थान पर खिसक गया है। वहीं 'अनुपमा' 1.5 के साथ पांचवें नंबर पर रहकर टॉप लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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