बारिश में धान बोने का बदला तरीका, पैडी ड्रम सीडर से एक साथ 8 कतारों में बुआई कर समय और पैसा बचा रहे किसान छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 58
खरीफ के मौसम में लगातार हो रही बारिश के बीच बालोद के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पैडी ड्रम सीडर तकनीक अपनाने की सलाह दी है, जो कम खर्च में धान की बंपर पैदावार देने में सक्षम है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान उत्पादक किसानों के सामने बुआई को समय पर पूरा करने की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। विशेष रूप से जब लगातार मानसूनी बारिश हो रही हो, तब खेतों की तैयारी और सही समय पर बोनी करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस विषम परिस्थिति से निपटने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ केआर साहू ने किसानों को एक बेहद कारगर और आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इस समय पारंपरिक तरीकों को छोड़कर पैडी ड्रम सीडर का उपयोग करना किसानों के लिए हर तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है। यह सरल कृषि यंत्र कम समय में अधिक क्षेत्र में धान की बुआई करने के साथ-साथ बीज, श्रम और लागत की भारी बचत करने में सक्षम है।

बारिश के मौसम में बुआई की चुनौतियां और लेही पद्धति

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ साहू ने बताया कि बारिश के बाद किसानों के पास धान की बुआई के लिए बहुत ही सीमित समय बचता है। ऐसी नाजुक स्थिति में क्षेत्र के अधिकांश किसान 'लाई-चोपी' या 'लेही' पद्धति का सहारा लेते हैं। इस पद्धति के तहत सबसे पहले धान के बीजों को कृत्रिम रूप से अंकुरित किया जाता है और फिर उसे सीधे गीले खेतों में डाल दिया जाता है। अंकुरित बीज होने की वजह से फसल बहुत जल्दी अंकुरित होकर बाहर निकल आती है, जिससे किसानों के कीमती समय की बड़ी बचत होती है। इसके विपरीत, यदि सूखे बीजों को सीधे खेत में बोया जाए, तो उन्हें अंकुरित होने में ही लगभग 7 से 10 दिन का लंबा समय लग जाता है।

हालांकि, लेही पद्धति में एक बड़ी समस्या यह है कि इसमें सामान्य की तुलना में काफी अधिक मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है, जिससे बीजों की बर्बादी भी अधिक होती है। इसके विपरीत, यदि धान की बुआई कतारों यानी लाइनों में की जाए, तो बहुत ही कम बीज में अधिक बड़े क्षेत्र में खेती करना संभव हो जाता है। कतार में बुआई करने से पौधों को समान रूप से पर्याप्त हवा, पानी और सूर्य का प्रकाश मिलता है। इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और अंततः फसल की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है।

पैडी ड्रम सीडर: एक बेहद सरल और उपयोगी यंत्र

लाइन से बुआई करने के लिए पैडी ड्रम सीडर एक बहुत ही उपयोगी, सरल और पर्यावरण के अनुकूल कृषि यंत्र है। इस मशीन की बनावट बहुत ही साधारण है, जिसे कोई भी किसान आसानी से समझ सकता है। इस यंत्र में एक बेलनाकार ड्रम लगा होता है, जिसके भीतर अंकुरित किए गए धान के बीजों को भर दिया जाता है। इस ड्रम के दोनों तरफ मजबूत पहिये लगे होते हैं।

जैसे ही किसान इस मशीन को पकड़कर आगे की ओर खींचता है, पहियों के घूमने के साथ ही ड्रम भी घूमने लगता है। ड्रम के घूमने से उसके भीतर मौजूद अंकुरित बीज एक निश्चित और बराबर दूरी पर स्वतः ही जमीन पर लाइनों में गिरते चले जाते हैं। इस यंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी सहायता से किसान एक ही बार में एक साथ 8 कतारों में धान की बुआई बेहद आसानी से कर सकते हैं।

बीज की भारी बचत और बिना ईंधन का खर्च

डॉ साहू ने इस यंत्र के आर्थिक फायदों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह मशीन किसानों के खर्च को काफी हद तक कम कर देती है। सामान्य छिड़काव विधि में किसान एक एकड़ खेत के लिए जितने बीज का इस्तेमाल करते हैं, उतनी ही मात्रा के बीज से इस मशीन के जरिए लगभग सवा एकड़ क्षेत्र में धान की बुआई की जा सकती है। इससे बीजों की सीधी बचत होती है जो किसानों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करती है।

इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी भी तरह के महंगे ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। इस यंत्र को संचालित करने के लिए न तो बैलों या भैंसों जैसे पशुओं की जरूरत पड़ती है और न ही पेट्रोल, डीजल या बिजली की खपत होती है। घर का कोई भी सामान्य व्यक्ति या मजदूर इसे बेहद आसानी से खींचकर चला सकता है, जिससे डीजल और अतिरिक्त मजदूरी का खर्च पूरी तरह बच जाता है।

पोर्टेबल डिजाइन और किफायती कीमत

पोर्टेबल और हल्का डिजाइन होने के कारण इस मशीन को एक खेत से दूसरे खेत तक आसानी से उठाकर ले जाया जा सकता है। चाहे लगातार हो रही तेज बारिश हो या फिर खेत की अत्यंत कठिन और दलदली परिस्थिति, यह यंत्र हर जगह सुचारू रूप से काम करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। भारतीय बाजार में इसकी कीमत भी काफी नियंत्रण में है। यह मशीन केवल 7 से 8 हजार रुपये के बीच आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिसे हमारे देश के छोटे और मध्यम वर्ग के किसान भी बिना किसी वित्तीय संकट के आसानी से खरीद सकते हैं।

पैडी ड्रम सीडर के मुख्य लाभ

इस आधुनिक कृषि यंत्र के उपयोग से किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • बीज की बचत: पारंपरिक छिड़काव विधि की तुलना में बीजों की खपत काफी कम होती है।
  • श्रम और लागत में कमी: किसी अतिरिक्त पशु या महंगे ईंधन की जरूरत न होने से बुआई का खर्च न्यूनतम हो जाता है।
  • समय की बचत: एक साथ 8 कतारों में बुआई होने के कारण काम बहुत तेजी से पूरा होता है।
  • बेहतर फसल विकास: पौधों को हवा, पानी और सूर्य का प्रकाश बराबर मात्रा में मिलने से उनकी बढ़त अच्छी होती है।
  • रोगों का कम प्रकोप: उचित दूरी पर बुआई होने की वजह से फसलों में कीड़े और बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • उत्पादन में वृद्धि: स्वस्थ पौधों के कारण प्रति एकड़ धान की पैदावार में काफी बढ़ोतरी देखी जाती है।

कृषि वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि आज के आधुनिक और चुनौतीपूर्ण दौर में पैडी ड्रम सीडर धान उत्पादक किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। खेती की बढ़ती लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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