धर्म
2 घंटे पहले
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विचारों
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को बेहद पवित्र तिथि माना जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर 15 जून दिन सोमवार को पड़ रहा है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी हो रहा है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितरों के तर्पण, पूजा-पाठ, दान और भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों से पितरों की कृपा बनी रहती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसी वजह से इस दिन सात्विक आहार, पूजा और दान-पुण्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर खान-पान को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। माना जाता है कि कुछ खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से पितृ दोष बढ़ सकता है और पितर रुष्ट हो सकते हैं, जबकि सात्विक भोजन से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इन चीजों का सेवन माना गया है वर्जित
सोमवती अमावस्या के दिन मांस, मछली और अंडे जैसे तामसिक भोजन का सेवन निषेध माना गया है। धार्मिक धारणा है कि इस दिन ऐसे भोजन से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पितरों की कृपा नहीं मिल पाती। इसके साथ ही शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में इन्हें अशुभ बताया गया है और ये आध्यात्मिक शुद्धता को प्रभावित करते हैं।
दूसरे के घर का भोजन करने से बचें
मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन किसी दूसरे के घर का बना भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से पुण्य का क्षय होता है। साथ ही इस दिन तिल के तेल का उपयोग वर्जित माना गया है, हालांकि पूजा-पाठ में दीपक जलाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त जमीन के भीतर उगने वाले कंदमूल और फल खाने से भी परहेज करना चाहिए।
इन दालों और सब्जियों से रखें दूरी
कई मान्यताओं के मुताबिक सोमवती अमावस्या तिथि पर चना, मसूर दाल, सरसों का साग और मूली खाना वर्जित माना गया है। इसके अलावा बैंगन, लौकी, खीरा, चना और जीरे का सेवन भी इस दिन उचित नहीं माना जाता। भोजन के साथ-साथ इस शुभ दिन पर गेहूं का आटा या चावल जैसे खाद्यान्न खरीदने से भी बचना चाहिए। अधिक तैलीय और तला-भुना भोजन भी इस दिन ठीक नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टि से सादा और सात्विक भोजन ही सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।
सोमवती अमावस्या पर क्या खाना रहेगा शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है। फल, दूध, दही, खीर, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और मौसमी फलों का सेवन किया जा सकता है। जो लोग व्रत नहीं रखते, वे भी सादा और शुद्ध शाकाहारी भोजन कर सकते हैं। इसके साथ ही दान के उद्देश्य से जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फल देना भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।
पितरों को प्रसन्न करने के उपाय
सोमवती अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और जल अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। पीपल के वृक्ष की पूजा, भगवान शिव का अभिषेक और गरीबों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन उपायों से पितृ दोष कम होता है और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। दरअसल सोमवती अमावस्या केवल एक तिथि भर नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है, इसीलिए इस दिन को बेहद पवित्र माना गया है।
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