DRDO की नई ताकत: कुशा मिसाइल ने भरी पहली उड़ान, दुश्मन के फाइटर जेट्स को आसमान में ही करेगी ढेर भारत एक महीने पहले 61
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा के तट पर लंबी दूरी की 'कुशा' मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया है, जो हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।

ओडिशा के तट पर दिखा भारतीय तकनीक का दम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने गुरुवार को अपनी नवीनतम मिसाइल प्रणाली कुशा का सफल परीक्षण संपन्न किया है। इस परीक्षण को ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से अंजाम दिया गया। यह कुशा लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण था, जिसने अपनी मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है।

हवाई खतरों के लिए काल बनेगी कुशा

परीक्षण के दौरान इस मिसाइल प्रणाली को एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के खिलाफ परखा गया। यह इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य आसमान में अत्यधिक ऊंचाई और तेज गति से आने वाले खतरों का अनुकरण कर रहा था, जिसे कुशा मिसाइल सिस्टम ने सटीकता के साथ हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के फाइटर जेट्स, घातक मिसाइलों, अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी ड्रोन और बड़े विमानों को एक व्यापक दायरे और ऊंचाई पर नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है।

स्वदेशी तकनीक का अनूठा संगम

कुशा मिसाइल सिस्टम को तैयार करने में DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उनके औद्योगिक सहयोगियों ने मिलकर काम किया है। इस पूरे वेपन सिस्टम के हर हिस्से, जिसमें रडार, कमांड और कंट्रोल सेंटर तथा मिसाइल शामिल हैं, को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है। यह उपलब्धि भारतीय रक्षा प्रणाली की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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