उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बुलडोजर कार्रवाई का असर अब अतिक्रमण करने वालों के मन में साफ झलकने लगा है। इसकी एक मिसाल बुधवार को उस वक्त देखने को मिली, जब कलेक्टर न्यायालय के आदेश पर तालाब की जमीन पर बने एक अवैध मदरसे को गिराने का फरमान जारी हुआ। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही मदरसा संचालक बैकफुट पर आ गए और उन्होंने खुद ही इमारत को तोड़वाना शुरू कर दिया।
15 साल से अवैध तौर पर संचालित था मदरसा
जानकारी के मुताबिक मदरसा जामिया अब्दुल्लाह बिन मसऊद पिछले 15 साल से अवैध रूप से चलाया जा रहा था। मामले की सुनवाई करते हुए कलेक्टर न्यायालय ने संचालक मौलाना शौकत कासमी की सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया और 15 दिनों के भीतर तालाब को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने का आदेश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसा न करने पर बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी।
संचालक पर लगा 10.46 लाख का जुर्माना
इसी सिलसिले में बुधवार को मदरसा संचालक ने बुलडोजर चलने से पहले ही इमारत पर हथौड़े चलवाने शुरू कर दिए। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर न्यायालय के आदेश में मौलाना शौकत कासमी पर 10.46 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
तालाब की 4 बीघा जमीन पर बना था मदरसा
बताया जा रहा है कि सदर तहसील के ग्राम कचनार में तालाब की करीब 4 बीघा जमीन पर जामिया अब्दुल्लाह बिन मसऊद के नाम से यह मदरसा संचालित किया जा रहा था, जो करीब 15 साल से चल रहा था। कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के दौरान डीएम डॉ. राजा गणपति आर ने इस मदरसे को गिराने का आदेश जारी किया था।
खुद ही चलवाने लगे छेनी-हथौड़ा
कलेक्टर न्यायालय ने संचालकों को 15 दिन का समय दिया था और साफ कहा था कि तय अवधि में कार्रवाई न होने पर तहसील प्रशासन बुलडोजर चलाएगा। बुलडोजर का ऐसा खौफ रहा कि संचालकों ने खुद ही मदरसे पर हथौड़ा और छेनी चलवाना शुरू कर दिया।
तोड़फोड़ की प्रक्रिया जारी
बिजली से चलने वाले बड़े-बड़े उपकरणों की मदद से मदरसे की छत काटी जा रही है। संचालक की ओर से खुद इमारत गिराए जाने का यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई शुरू करने से पहले संचालक ने पहले मदरसे को खाली कराया और उसके बाद तोड़ने का काम आरंभ किया।
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