सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ चीनी दुष्प्रचार पर कसा शिकंजा, नफरती सामग्री ब्लॉक करने का आदेश भारत एक घंटा पहले 5
सिंगापुर सरकार ने भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली भड़काऊ और विभाजनकारी ऑनलाइन सामग्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि इस तरह के कंटेंट की जड़ें काफी हद तक चीन से जुड़े ऑनलाइन सूचना तंत्र से जुड़ी हैं।

नई दिल्ली/सिंगापुर: सिंगापुर सरकार ने भारतीय समुदाय के विरुद्ध भड़काऊ और विभाजनकारी सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे ऐसी सामग्री तक लोगों की पहुंच को रोकें, जो भारतीय समुदाय को निशाना बनाती है और देश की बहुसांस्कृतिक पहचान को क्षति पहुंचाने की कोशिश करती है। सिंगापुर का आकलन है कि इस प्रकार के कंटेंट की शुरुआत बड़े पैमाने पर चीन से जुड़े ऑनलाइन सूचना तंत्र के जरिए हुई।

सिंगापुर सरकार का बड़ा कदम

भारत स्थित सिंगापुर के उच्चायोग ने शनिवार को इस बारे में जानकारी साझा की। सिंगापुर के गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023 के तहत सिंगापुर पुलिस बल ने यूट्यूब, फेसबुक और एक्स पर प्रसारित हो रही कुछ पोस्टों के विरुद्ध 'डिसेबलिंग डायरेक्शन' जारी किए हैं। इन निर्देशों के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों को यह तय करना होगा कि सिंगापुर के यूजर्स इन पोस्टों तक न पहुंच सकें। सरकार के अनुसार ये पोस्ट भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत और गलत धारणाएं फैलाने की कोशिश कर रही थीं।

चीन से आई पोस्टों में भड़काऊ दावे

गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले महीने चीनी ऑनलाइन सूचना क्षेत्र में कुछ ऐसे नैरेटिव फैलने लगे जिनमें दावा किया गया कि सिंगापुर अपनी सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति को लेकर चिंतित है। इसके कुछ समय बाद इंटरनेट पर ऐसी सामग्री दिखने लगी, जिसमें सिंगापुर की सांस्कृतिक विविधता पर सवाल खड़े किए गए और यह जताने की कोशिश की गई कि देश भारतीयों से 'भरता' जा रहा है। सरकार ने कहा कि इन पोस्टों में कई भ्रामक और उकसाने वाले दावे मौजूद थे।

भारतीयों के प्रति नफरत भड़काने का प्रयास

चीन की ओर से आई इस सामग्री में कहा गया कि सिंगापुर की बहु-नस्ली अथवा मल्टीरेशियल नीति केवल पश्चिमी देशों को प्रभावित करने के लिए गढ़ी गई एक दिखावटी व्यवस्था है। कुछ पोस्टों में यह भी दावा किया गया कि देश की स्थिरता की वजह उसकी बहु-नस्ली नीति नहीं, बल्कि चीनी मूल की बहुसंख्यक आबादी है। इसके साथ ही कुछ सामग्री में आरोप लगाया गया कि सिंगापुर में भारतीय मूल के राजनेताओं की संख्या बढ़ रही है और वे भारतीय प्रवासियों के पक्ष में काम करेंगे।

कई पोस्टों में चीनी संस्कृति का गुणगान

वहीं कुछ पोस्टों में यह तक कहा गया कि सिंगापुर की संस्कृति मूल रूप से चीनी संस्कृति है और यदि सरकार चीन से दूरी बनाकर भारतीय समुदाय के बढ़ते प्रभाव की अनदेखी करती रही तो इसके नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। सिंगापुर सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि देश न तो जातीय श्रेष्ठता की सोच को मान्यता देता है और न ही विदेशियों के प्रति नफरत को। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा करने की हर कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।

सरकार की जनता से अपील

बयान में कहा गया कि जब ऐसे हमले किसी विदेशी स्रोत की ओर से किए जाएं तो वे और भी गंभीर हो जाते हैं। सरकार सामाजिक एकता, नस्ली सद्भाव और राष्ट्रीय एकजुटता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी और ऐसे मामलों में दृढ़ता से कदम उठाएगी। सिंगापुर सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली जानकारी को बिना जांचे-परखे साझा न करें। लोगों से कहा गया है कि वे अफवाहों और भड़काऊ सामग्री से सतर्क रहें और समाज को बांटने की किसी भी कोशिश को मिलकर नाकाम करें।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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