राजस्थान पर्यटन: सीकर के नानी बीड़ में बसा पक्षियों का संसार, 40 से अधिक प्रजातियों ने बनाया आशियाना राजस्थान 2 घंटे पहले 3
सीकर का नानी बीड़ संरक्षित वन क्षेत्र अब नानी पारिस्थितिकी उद्यान एवं पक्षी विहार के रूप में विकसित हो चुका है, जहां 40 से अधिक पक्षी प्रजातियां बसेरा कर रही हैं और मियावाकी तकनीक से सघन वन तैयार किया गया है।

सीकर का नानी बीड़ संरक्षित वन क्षेत्र अब परिंदों के एक पसंदीदा ठिकाने के रूप में पहचान बना रहा है। इस इलाके को नानी पारिस्थितिकी उद्यान एवं पक्षी विहार के रूप में संवारा गया है, जहां 40 से अधिक पक्षी प्रजातियां अपना घर बना चुकी हैं और यही इसे पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनाती हैं।

सहायक वन संरक्षक सौरभ कुमार के अनुसार, वन विभाग की ओर से करीब 295.75 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में से लगभग 240 हेक्टेयर भाग को इको-टूरिज्म के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। पक्षियों के अनुकूल माहौल तैयार करने के मकसद से अलग-अलग जगहों पर जलाशय बनाए गए हैं, साथ ही पर्यटकों और शहरवासियों को लुभाने के लिए कई सुविधाएं भी जुटाई गई हैं।

पक्षियों का पसंदीदा बसेरा

सौरभ कुमार ने बताया कि उद्यान के बीचों-बीच बना जलाशय प्रवासी और स्थानीय दोनों तरह के पक्षियों को खूब भाता है। गर्मियों के मौसम में भी यहां पानी बना रहता है, जिसके चलते राजहंस समेत 40 से अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां देखे जा सकते हैं।

पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष बर्ड हाइड्स तैयार किए गए हैं, जहां से बिना किसी खलल के परिंदों को निहारा जा सकता है। इसके अलावा उद्यान में करीब 5 किलोमीटर लंबा नेचर ट्रैक भी बनाया गया है, जहां प्रकृति प्रेमी और सैलानी टहलने का लुत्फ उठा सकते हैं।

मियावाकी तकनीक से तैयार घना जंगल

उन्होंने बताया कि नानी बीड़ संरक्षित वन क्षेत्र को जापान की मियावाकी तकनीक के जरिए विकसित किया गया है। इस पद्धति की मदद से कम समय में ही सघन वन खड़ा कर दिया गया है। पूरे उद्यान में 15 हजार से अधिक देशी प्रजातियों के पौधे रोपे गए हैं।

यहां औषधीय पौधों का एक अलग ब्लॉक और कैक्टस गार्डन भी तैयार किया गया है, जो वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए किसी खुली प्रयोगशाला से कम नहीं है। बच्चों के लिए झूलों समेत आधुनिक किड्स प्ले एरिया भी बनाया गया है, जिससे यह जगह परिवारों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई है।

साइन बोर्ड से मिलती रोचक जानकारी

उद्यान में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के मकसद से देश के सभी राज्यों के राज्य पक्षी, राज्य पशु, राज्य वृक्ष और राज्य पुष्प की जानकारी देने वाले साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इससे बच्चों को प्रकृति के साथ-साथ भौगोलिक जानकारी भी आसानी से मिल जाती है।

शहर के बीचोंबीच मौजूद यह उद्यान कार्बन अवशोषण के एक अहम केंद्र के रूप में भी आकार ले रहा है। यही वजह है कि यहां आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर बच्चे, विद्यार्थी और पर्यावरण प्रेमी इस स्थान को काफी पसंद कर रहे हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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