जहां चूने के बदले खरीदा जाता था सोना, अब वहीं हैं 40 से अधिक डॉक्टर — हवेलियों को संवारने वाला राजपुरा राजस्थान एक घंटा पहले 3
सीकर के राजपुरा गांव की पहचान कभी चूना पत्थर के कारोबार और सोने के आभूषणों से थी, लेकिन आज यह 'डॉक्टरों के गांव' के रूप में पूरे क्षेत्र में मशहूर है।

सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ उपखंड में बसा राजपुरा गांव अपनी ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक श्रद्धा और शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान रखता है। करीब 225 वर्ष पुराने इस गांव की कहानी समृद्धि, आस्था और बदलाव की मिसाल है।

चूने के कारोबार से सोने तक का सफर

बीते दौर में राजपुरा की पहचान चूना पत्थर के व्यापार से जुड़ी हुई थी। इस कारोबार से होने वाली कमाई के बदले यहां के ग्रामीण सोना खरीदा करते थे। यही वजह रही कि इस गांव को सबसे अधिक 'म्हेल' यानी सोने के पारंपरिक आभूषण रखने वाला गांव कहा जाने लगा।

शेखावाटी की हवेलियों में योगदान

शेखावाटी की मशहूर हवेलियों के निर्माण में भी राजपुरा के पत्थर की अहम भूमिका रही है। यहां से निकले पत्थर ने इस इलाके की स्थापत्य कला को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आस्था का केंद्र

संत मालदास बाबा से जुड़ी चमत्कारी कथाएं आज भी गांववासियों की गहरी श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही ये कहानियां ग्रामीणों की धार्मिक भावना से जुड़ी हैं।

डॉक्टरों का गांव

आज राजपुरा अपनी एक नई पहचान के लिए जाना जाता है। करीब 350 घरों और लगभग 2500 की आबादी वाले इस गांव में 40 से अधिक डॉक्टर हैं। इसी खासियत के चलते राजपुरा पूरे क्षेत्र में 'डॉक्टरों के गांव' के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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