मध्य प्रदेश
एक दिन पहले
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विचारों
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी की कार्यशैली को सराहा
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 136वें एपिसोड में विशेष रूप से सीधी जिले का उल्लेख करते हुए वहां की जल प्रबंधन रणनीति की खुलकर तारीफ की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कैच द रेन अभियान अब देश में एक बड़ा जन आंदोलन बन चुका है और इसमें सीधी जिले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोगों की सक्रिय भागीदारी से यहां जिस तरह से जल स्रोतों का कायाकल्प किया गया है, उसने पूरे देश का ध्यान खींचा है।
सीधी में जल संरक्षण का अभूतपूर्व रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि सीधी जिले में लोगों ने मिलकर करीब डेढ़ हजार खेत तालाबों का निर्माण किया है। यह कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे धरातल पर उतारकर एक मिसाल पेश की गई है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो सीधी जिले में अब तक कुल 12 हजार 983 जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसमें 1489 नए तालाबों का निर्माण शामिल है, जो जिले की तस्वीर बदलने में सहायक साबित हुए हैं। जिन पुराने जल स्रोतों को दशकों से भुला दिया गया था, उन्हें भी इस अभियान के तहत पुनर्जीवित करने का काम किया गया है।
कैच द रेन और जनभागीदारी का मॉडल
4 जुलाई से पूरे देश में जल संरक्षण का जो व्यापक अभियान शुरू हुआ है, उसका मूल मंत्र है कि जहां बारिश का पानी गिरे, उसे वहीं सहेजा जाए। प्रधानमंत्री ने सीधी के अलावा नरसिंहपुर जिले में अमृत सरोवरों को बेहतर बनाने के प्रयासों की भी सराहना की। सीधी में यह सफलता इसलिए मिली क्योंकि इसे सरकारी योजना के बजाय एक सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया गया। गांवों की पंचायतों से लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों तक, सभी ने एक साथ आकर इस कार्य को सफल बनाने में अपना योगदान दिया है।
नदियों का पुनर्जीवन और भूजल स्तर में सुधार
सीधी जिले की सफलता केवल नए तालाब बनाने तक सीमित नहीं है। यहां की प्रमुख नदियों जैसे कि सोन, गोपद और बनास जैसी बारहमासी नदियों को बचाने के लिए भी एक बड़ा अभियान छेड़ा गया था। इन नदियों की सफाई और इनके संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर मेहनत की है। जल संरचनाओं के निर्माण और बारिश के पानी को सही तरीके से संचित करने का सीधा असर जिले के भूजल स्तर पर देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में अपनाए गए इस जल प्रबंधन मॉडल को यदि अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए, तो भविष्य में देश के जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जिले के लोगों में उत्साह और प्रेरणा
प्रधानमंत्री द्वारा नाम लिए जाने के बाद से ही सीधी जिले के निवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोग इसे अपनी सालों की मेहनत और सामूहिक प्रयासों की सबसे बड़ी पहचान मान रहे हैं। सीधी जिले के जिला पंचायत CEO शैलेंद्र सोलंकी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने जिले के मॉडल को जल संरक्षण और जनभागीदारी के सर्वोत्तम उदाहरण के रूप में पेश किया है। अब सीधी का यह जल संरक्षण मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। ग्रामीण स्तर पर जिस तरह से लोगों ने आगे आकर अपनी जमीन और संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया, वह वास्तव में सराहनीय है और यह जिले के लिए गौरव का क्षण है।
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