सोन घड़ियाल अभ्यारण में नई जान, 80 शावकों के जन्म से जगी संरक्षण की उम्मीद मध्य प्रदेश एक महीने पहले 20
मध्य प्रदेश के सीधी जिले स्थित सोन घड़ियाल अभ्यारण के जोगदहा घाट क्षेत्र में करीब 80 घड़ियाल शावकों का जन्म हुआ है। नर घड़ियालों की कमी से जूझ रहे इस अभ्यारण में लगातार दूसरी बार सफल प्रजनन ने संरक्षण प्रयासों को नई दिशा दी है।

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित सोन घड़ियाल अभ्यारण एक बार फिर नई जिंदगियों की आहट से गुलजार हो उठा है। जोगदहा घाट क्षेत्र में मादा घड़ियालों के दिए अंडों से करीब 80 नन्हे शावकों का जन्म हुआ है। वर्षों तक नर घड़ियालों की कमी के चलते प्रजनन संकट से जूझ रहे इस इलाके में यह उपलब्धि वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी सौगात बनकर आई है।

संकट के बीच मिली बड़ी सफलता

सोन घड़ियाल अभ्यारण देश के अहम घड़ियाल संरक्षण क्षेत्रों में गिना जाता है। हालांकि बीते कई वर्षों से यहां नर घड़ियालों की संख्या बेहद कम हो जाने के कारण मादा घड़ियालों के दिए अंडों से बच्चे जन्म नहीं ले पा रहे थे। इसी वजह से अभ्यारण में घड़ियालों की संख्या लगातार घट रही थी। ऐसे में जोगदहा घाट क्षेत्र में करीब 80 शावकों के जन्म को संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक नतीजा माना जा रहा है।

विशेष अभियान से बदली तस्वीर

प्रजनन संकट की चुनौती को देखते हुए वन विभाग ने संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष अभियान चलाया। घड़ियालों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया, निगरानी को मजबूत किया गया और उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखने पर खास ध्यान दिया गया।

इन कोशिशों का असर अब साफ नजर आ रहा है। जोगदहा घाट क्षेत्र में मादा घड़ियालों द्वारा सुरक्षित स्थानों पर दिए गए अंडों से लगभग 80 शावक बाहर आए हैं। यह लगातार दूसरा मौका है जब अभ्यारण में सफल प्रजनन हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कामयाबी आने वाले समय में घड़ियालों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण को और पुख्ता करने में अहम भूमिका निभाएगी।

शावकों की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी

नवजात शावकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। विभाग ने अलग-अलग निगरानी दल बनाए हैं, जो चौबीसों घंटे क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए मादा घड़ियालों और उनके बच्चों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वनकर्मी नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण भी कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

अधिकारियों ने जताया भरोसा

उप संचालक राजेश कन्ना टी के अनुसार, सभी नवजात शावकों और मादा घड़ियालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। विभाग का लक्ष्य इन बच्चों को ऐसा सुरक्षित वातावरण देना है, जिसमें उनकी बेहतर वृद्धि हो सके।

पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अहम

वन अधिकारियों का कहना है कि घड़ियाल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा हैं और उनकी बढ़ती संख्या पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में सोन घड़ियाल अभ्यारण में 80 नन्हे घड़ियालों का जन्म वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही रणनीति, सतत निगरानी और लगातार संरक्षण प्रयासों से विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही प्रजातियों को नया जीवन दिया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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