रोज शैम्पू करें या हफ्ते में दो दिन? जानिए एक्सपर्ट की राय जीवनशैली एक महीने पहले 22
हेयर एक्सपर्ट डॉ. अरिका बंसल के मुताबिक भारत जैसे धूल भरे माहौल में हफ्ते में दो नहीं बल्कि चार से पांच बार बाल धोने चाहिए। साफ स्कैल्प ही बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है।

बालों की सफाई के लिए शैम्पू तो हर कोई इस्तेमाल करता है, लेकिन इसे कितनी बार लगाना सही रहता है, इस पर लोगों की राय अलग-अलग होती है। कुछ लोग हफ्ते में दो बार बाल धोते हैं तो कुछ रोजाना। सवाल यह है कि जड़ों में जमी गंदगी हटाने के लिए शैम्पू रोज करना चाहिए या हफ्ते में दो-तीन बार ही काफी है? इसी विषय पर हेयर एक्सपर्ट डॉ. अरिका बंसल ने राज शमानी के पॉडकास्ट में बाल धोने का सही तरीका साझा किया है।

क्यों बढ़ रही है हेयर फॉल की समस्या

डॉ. अरिका बंसल का कहना है कि आजकल लोगों में बालों से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर हेयर फॉल। इसके पीछे कई वजहें होती हैं। भारत जैसे देश में जब लोग घर से बाहर निकलते हैं तो बालों की जड़ों में धूल, मिट्टी और पसीना जमना स्वाभाविक है। ऐसे में बालों को धोना बेहद जरूरी हो जाता है। मगर ज्यादातर लोग जल्दी हेयर वॉश नहीं करते, और यही आदत हेयर फॉल की एक बड़ी वजह बन जाती है।

हफ्ते में कितने दिन धोने चाहिए बाल

डॉ. अरिका बंसल के अनुसार, भारत में धूल-मिट्टी बहुत ज्यादा है, इसलिए लोगों को हफ्ते में दो दिन नहीं बल्कि चार से पांच बार बाल धोने चाहिए। उनका मानना है कि जब स्कैल्प साफ रहेगा, तभी बाल जड़ से मजबूत बनेंगे। हालांकि अगर कोई व्यक्ति ज्यादातर समय एसी में रहता है, बाहर कम निकलता है और उसका एक्सपोजर कम है, तो वह बाल धोने की फ्रीक्वेंसी घटा सकता है। उनका कहना है कि जड़ों में जमी गंदगी स्कैल्प को कमजोर करती है। वहीं टीनएजर्स को वे रोजाना बाल धोने की सलाह देती हैं।

इन बातों का भी रखें खास ध्यान

हार्ड केमिकल वाले शैम्पू बालों को कमजोर बना देते हैं, इसलिए हमेशा सल्फेट फ्री शैम्पू का ही इस्तेमाल करना चाहिए। सल्फेट फ्री शैम्पू बालों को डैमेज होने से बचाते हैं। इसके साथ ही एक जरूरी बात यह है कि कंडीशनर हमेशा बालों पर लगाना चाहिए, स्कैल्प पर नहीं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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