हिमाचल छात्रवृत्ति घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने रजनीश बंसल की अग्रिम जमानत रद्द की, ईडी को मिली हिरासत में पूछताछ की मंजूरी हिमाचल प्रदेश 2 घंटे पहले 5
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में सच्चाई का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी रजनीश बंसल की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल की अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और कथित मनी ट्रेल के इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना अत्यंत आवश्यक है।

अदालत ने जांच एजेंसी के अधिकार को माना महत्वपूर्ण

इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्तम एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि जब बात देश के आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाले गंभीर वित्तीय अपराधों की हो, तो जांच एजेंसियों को निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावी तरीके से तफ्तीश करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि अग्रिम जमानत रद्द करने का यह फैसला केवल जांच की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है, और इसे मुख्य मामले के अंतिम फैसले या गुण-दोष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ईडी ने कोर्ट के समक्ष रखीं अपनी दलीलें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह पूरा मामला समाज के सबसे जरूरतमंद तबकों, यानी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के उज्ज्वल भविष्य से खिलवाड़ करने से जुड़ा है। सरकार द्वारा इन छात्रों के लिए जारी की गई पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की भारी-भरकम राशि का गलत इस्तेमाल किया गया और उसे निजी खातों में डायवर्ट किया गया।

ईडी ने दलील दी कि जब तक आरोपी को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ नहीं की जाती, तब तक इस विशाल वित्तीय नेटवर्क और धन के अवैध हस्तांतरण (मनी ट्रेल) के असली स्रोतों का पता लगाना नामुमकिन है। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि आरोपी को पहले मिली अग्रिम जमानत के कारण जांच की गति काफी धीमी हो गई थी और पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।

समझिए क्या है यह 250 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना वास्तव में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और पिछड़े वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय मदद प्रदान करना है।

इस घोटाले की शुरुआत साल 2012-13 से हुई और यह साल 2017-18 तक लगातार चलता रहा। साल 2018 में जब शिक्षा विभाग ने छात्रवृत्ति वितरण के रिकॉर्ड की आंतरिक जांच की, तो बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली और गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ। जांच में यह सामने आया कि राज्य के कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी छात्रों के प्रवेश दिखाए, जाली दस्तावेजों का सहारा लिया और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति सीधे सरकारी खजाने से हासिल कर ली। इस पूरी हेराफेरी के कारण सरकारी खजाने को करीब 250 करोड़ रुपये की भारी क्षति होने का अनुमान लगाया गया था। इस मामले की शुरुआती जांच में 22 से ज्यादा निजी शिक्षण संस्थानों की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई थी।

सीबीआई जांच के बाद ईडी की हुई एंट्री

मामले की गंभीरता और बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार को देखते हुए, साल 2019 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के कड़े निर्देश दिए थे। सीबीआई ने अपनी विस्तृत तफ्तीश के बाद राज्य के कई बड़े निजी संस्थानों के मालिकों, शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश रचने की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए थे।

सीबीआई की प्राथमिक जांच में सामने आए गंभीर सबूतों और तथ्यों को आधार बनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में अपनी समानांतर जांच शुरू की। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की। इसी मामले में आरोपी रजनीश बंसल को पहले अग्रिम जमानत मिल गई थी, जिसे ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने बंसल की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया है, तो ईडी जल्द ही उन्हें हिरासत में लेकर कड़े सवाल-जवाब करेगी, जिससे इस घोटाले से जुड़े कई अन्य चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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