राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव
भारत और बांग्लादेश के बीच इस समय राजनयिक मोर्चे पर गहमागहमी का दौर जारी है। बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले काफी सख्त रवैया अपना लिया है। ढाका ने स्पष्ट कर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अनुकूल माहौल की आवश्यकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से अपनी चिंताओं को भारत के सामने रखा है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य भगोड़े आरोपियों का जल्द से जल्द प्रत्यर्पण सबसे प्रमुख मांग है।
प्रत्यर्पण की शर्त और बांग्लादेश का कड़ा रुख
ढाका में मौजूद नीति निर्धारकों के लिए शेख हसीना का प्रत्यर्पण एक 'रेड लाइन' की तरह बन गया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत से इन मामलों में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। शेख हसीना के अलावा, शहीद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को भी प्रत्यर्पण समझौते के तहत बांग्लादेश को सौंपने की मांग की गई है। नई दिल्ली के गलियारों में अब इस बात पर मंथन तेज हो गया है कि ढाका की इन मांगों पर भारत सरकार को अपना अगला कदम और रुख स्पष्ट रूप से बताना होगा। दिलचस्प है कि हसीना के प्रत्यर्पण की यह मांग पहली बार 2024 में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान उठाई गई थी, जिसे फरवरी 2026 में कार्यभार संभालने वाली वर्तमान बीएनपी सरकार ने और अधिक मजबूती के साथ दोहराया है।
प्रस्तावित दौरे पर ग्रहण और शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस
भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा के लिए 21 अगस्त की तारीख प्रस्तावित की गई थी। हालांकि, 5 अगस्त को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से दोनों देशों के बीच संवाद का माहौल प्रभावित हुआ है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने दावा किया था कि वह इस साल दिसंबर तक बांग्लादेश वापस लौट सकती हैं, साथ ही उन्होंने अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई थी। बांग्लादेश सरकार ने इस घटना को एक बड़ा झटका माना है। तारिक रहमान सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक भारत प्रत्यर्पण के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन या जवाब नहीं देता, तब तक यात्रा के लिए स्थितियां सामान्य नहीं मानी जा सकतीं। हालांकि, नई दिल्ली ने इन आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और भारत हसीना के बयानों का समर्थन भी नहीं करता है।
कूटनीतिक बातचीत और 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि दोनों पक्षों के अधिकारी पिछले कई हफ्तों से तारिक रहमान के द्विपक्षीय दौरे की संभावनाओं पर संपर्क में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 5 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया है। मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि शेख हसीना को बांग्लादेश की अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और वहां की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया है। साथ ही, उनकी पार्टी अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। ढाका ने अपनी 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति को दोहराते हुए कहा कि वह संप्रभु समानता और आपसी सम्मान के आधार पर पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने का पक्षधर है, लेकिन इसमें आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना सबसे जरूरी शर्त है।
तनाव के पीछे की अन्य वजहें
जून की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच रहमान के दौरे को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन इस बीच अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में लेने और उन्हें वापस भेजने की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि तारिक रहमान का अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन को चुनना भी नई दिल्ली के लिए एक संकेत था। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, जब 21 अगस्त की तारीख पर चर्चा चल रही थी, तभी ढाका को पता चला कि हसीना नई दिल्ली के 'फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया' में प्रेस को संबोधित करेंगी। इस पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तुरंत एनएसए अजीत डोभाल को फोन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
समाधान की कोशिशें और खुफिया स्तर पर सक्रियता
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ मुलाकात कर इस मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। जब हसीना ने एफसीसी (FCC) में विदेशी और भारतीय पत्रकारों को संबोधित किया, तो ढाका ने इसे भारत सरकार की मौन सहमति के रूप में लिया। नई दिल्ली लगातार यह कह रही है कि इस कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद, भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी, R&AW के प्रमुख पराग जैन ने 9 अगस्त को ढाका का दौरा किया और वहां के सुरक्षा अधिकारियों से चर्चा की। बांग्लादेशी अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया कि नई दिल्ली को उनकी चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना होगा। फिलहाल, दोनों देश तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान की तलाश कर रहे हैं, लेकिन 21 अगस्त की प्रस्तावित तारीख तक किसी ठोस परिणाम पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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