सर्वपितृ अमावस्या पर दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक, दूर होगा गृह कलह और बरसेगी पितरों की कृपा धर्म 8 घंटे पहले 3
पितृ पक्ष की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या पर विशेष उपाय करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। जानिए इस दिन कौन से कार्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व

श्राद्ध पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है, जो पितरों को समर्पित वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। आश्विन मास की अमावस्या तिथि को पड़ने वाली इस विशेष तिथि पर उन सभी पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है, जिनकी निधन की तिथि परिजनों को ज्ञात नहीं होती या किन्हीं कारणों से जिनका श्राद्ध अनुष्ठान नहीं हो पाता। इस दिन धार्मिक कार्यों के माध्यम से लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

घर में कलह और पितृ दोष का संबंध

देवघर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार, कई बार परिवार में बिना किसी स्पष्ट कारण के आए दिन झगड़े और क्लेश की स्थिति बनी रहती है। अक्सर सदस्य कड़ी मेहनत करते हैं और तरक्की भी हासिल करते हैं, फिर भी घर का वातावरण अशांत रहता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी स्थितियों को कई बार पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि हर पारिवारिक विवाद के पीछे पितृ दोष ही जिम्मेदार हो यह आवश्यक नहीं है, परंतु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के निमित्त किए गए सत्कर्मों से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी और इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। अतः पितरों को प्रसन्न करने का यह अंतिम अवसर है। परिवार की सुख-शांति के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इससे पितृ दोष के प्रभाव में कमी आती है और गृह कलह दूर होता है।
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध का अनुष्ठान अवश्य करें।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना शुभ फलदायी होता है।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने से पितरों की कृपा बनी रहती है और परिवार में बरकत आती है।

इन छोटे-छोटे उपायों और सच्ची श्रद्धा के साथ किए गए कर्मों से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन में व्याप्त बाधाओं का भी निवारण होता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप