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9 घंटे पहले
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नाना पाटेकर के परिवार की दुनिया
फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के कारण इस महान कलाकार ने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही सिनेमा के एक युग का अंत हो गया है। नाना पाटेकर की जिंदगी से जुड़ी कई अनकही बातें और उनके करियर के संघर्ष अब फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। हालांकि, उनका परिवार हमेशा ही मीडिया की चकाचौंध और सुर्खियों से दूर रहा है। नाना और उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर भी इसी श्रेणी में आते हैं। पिता की अपार लोकप्रियता के बावजूद मल्हार ने कभी लाइमलाइट का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की। पिता के निधन की दुखद पुष्टि करने वाले सदस्यों में मल्हार ही सबसे पहले आगे आए थे। अभिनय में अपना नाम चमकाने के बजाय उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं को सीखना बेहतर समझा।
कौन हैं मल्हार पाटेकर?
मल्हार पाटेकर, नाना पाटेकर और नीलकांति पाटेकर की संतान हैं। अपने पिता की तरह वे कभी भी अभिनय की दुनिया के सुपरस्टार के रूप में खबरों में नहीं रहे। मल्हार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक करने से परहेज है। वे बेहद सीमित मौकों पर ही मीडिया के कैमरों के सामने दिखाई देते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मल्हार का झुकाव बचपन से ही फिल्मों की तरफ था, लेकिन उन्होंने इसे अभिनेता बनने के लिए नहीं, बल्कि फिल्ममेकिंग को समझने के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने मुंबई के सरस्वती मंदिर हाई स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की और बाद में कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से फिल्म निर्माण में अपना ध्यान केंद्रित किया और एक सहायक निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। इस तरह उन्होंने पिता की शोहरत का उपयोग करने के बजाय अपने दम पर फिल्म के रचनात्मक पक्ष को समझने का कड़ा रास्ता चुना।
बाल कलाकार के रूप में शुरुआत
भले ही मल्हार ने एक्टिंग को मुख्य पेशा नहीं बनाया, लेकिन वे पर्दे पर बतौर बाल कलाकार नजर आ चुके हैं। साल 1991 में आई फिल्म प्रहार: द फाइनल अटैक में उन्होंने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म का निर्देशन खुद नाना पाटेकर ने किया था और मुख्य भूमिका में भी वही थे। यह मल्हार के लिए अपने पिता के साथ काम करने का पहला मौका था। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण में अपनी रुचि दिखाई। मल्हार ने प्रसिद्ध निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फिल्म द अटैक्स ऑफ 26/11 में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी रुचि केवल अभिनय तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे फिल्म निर्माण की संपूर्ण जटिल प्रक्रिया को बारीकी से समझना चाहते थे।
द लिटिल गॉडफादर में भूमिका
मल्हार पाटेकर के नाम एक और महत्वपूर्ण एक्टिंग क्रेडिट द लिटिल गॉडफादर से जुड़ा है। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन जॉय ऑगस्टीन ने किया था। इस फिल्म में मल्हार एक सहायक भूमिका में थे और उनके साथ फिल्म में अंगद बेदी भी मुख्य कलाकारों में शामिल थे। इसके बाद भी मल्हार ने कभी फिल्मी परिवारों के बच्चों की तरह बड़े बैनर की फिल्मों में पैर जमाने की होड़ नहीं दिखाई। उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए फिल्म निर्माण को प्राथमिकता दी और ग्लैमर की दुनिया से हमेशा एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखी।
पिता के साथ बेहद सादगीपूर्ण रिश्ता
नाना पाटेकर अपने बेबाक और स्पष्टवादी स्वभाव के लिए जाने जाते थे, वहीं उनके बेटे मल्हार का स्वभाव काफी शांत और संयमित रहा है। उन्होंने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखा है। कभी-कभार ही उन्हें पिता के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया है। नाना के निधन के बाद मल्हार का नाम एक बार फिर सामने आया है। उनके पिता के अंतिम संस्कार की तैयारियों की जिम्मेदारी मल्हार संभाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके डोंजे गांव वाले फार्महाउस पर किया गया है।
पिता की विरासत से एक अलग राह
मल्हार पाटेकर का सफर इस मायने में बेहद अनोखा है कि इतने बड़े सुपरस्टार के बेटे होने के बाद भी उन्होंने पारंपरिक फिल्मी रास्तों को नजरअंदाज किया। उन्होंने कैमरे के सामने एक चमकता हुआ सितारा बनने के बजाय, कैमरे के पीछे रहकर फिल्म निर्माण की बारीक तकनीकों को सीखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझा।
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